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सूचना तंत्र के मामले में 2025 तक भारत होगा आत्मनिर्भर

Sun, 13 Sep 2015 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 13 Sep 2015 01:49 AM IST
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By 2025, India will be self-sufficient in terms of information system
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सूचना तंत्र तथा आधुनिक तकनीकी से लैस राडार बनाने के मामले में भारत 2025 तक आत्मनिर्भर होगा। उस समय तक 85 से 90 फीसदी उपकरण भारत में ही बनने लगेंगे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जेके इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में आए डीआरडीओ बंगलूरू के निदेशक डॉ.डीसी पांडेय ने सुरक्षा और विकास की दृष्टि से राडार की उपयोगिता तथा उसके प्रकार पर विस्तार से जानकारी दी।
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डॉ.डीसी पांडेय ने बताया कि  मेक इन इंडिया के तहत 2025 तक सभी उपकरण देश में ही बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए इंडस्ट्रीज विकसित की जा रही हैं। यह लक्ष्य पूरा होगा। उन्होंने बताया कि राडार अब सिर्फ सूचना प्रदान करने का माध्यम मात्र नहीं रह गए हैं। बदलावों के साथ राडार भी स्मार्ट और बहुउद्देशीय हो गए हैं। राडार की मदद से टारगेट की जानकारी के साथ उसमें मौजूद तत्व, उनकी गति, लोकेशन समेत पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है। इतना ही नहीं लक्ष्य की ताकत और कमजोरी का भी पता लगाया जा सकता है।
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राडार की मदद से एक कमरे में मौजूद लोगों की संख्या, हथियार आदि की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह सब ऑटोमैटिक तरीके से और बहुत तेज गति से होता है। निदेशक ने अलग-अलग तरह के राडार पर भी विस्तार से जानकारी दी।
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डीआरडीओ बंगलूरू के निदेशक डॉ.डीसी पांडेय को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जेके इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर एसएन घोष अवार्ड से नवाजा गया। शनिवार को संस्थान में आयोजित समारोह में उन्हें अवार्ड प्रदान किया गया। डॉ.डीसी पांडेय ने जेके इंस्टीट्यूट से ही डीफिल की है। उन्होंने 1977 से 1981 के बीच प्रोफेसर एसएन घोष के शिष्य प्रोफेसर प्रोफेसर डीसी अग्रवाल के निर्देशन में शोध कार्य पूरा किया था। इस तरह से कई अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवार्ड पा चुके डॉ.डीसी पांडेय खुद के संस्थान में अवार्ड पाकर काफी खुश दिखे। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान है।


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स विभाग में शनिवार को आयोजित सेमिनार में रेलवे की सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य अतिथि उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ट्रेन का सफर भी सुरक्षित होता गया। उन्होंने बताया कि 1961 में रेलवे में 130 दुर्घटनाएं हुईं। क्रासिंग लेवल पर 181 घटनाएं हुईं। जबकि, 2015 में पांच-पांच घटनाएं हुईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्मृति डागर ने की। कार्यक्रम को मुख्य सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर कोर डीके गुप्ता, डीएन तिवारी, प्रोफेसर केके भूटानी, डॉ.यूएस तिवारी, प्रोफेसर पवन कपूर, डॉ.अजीत खरे आदि ने संबोधित किया।
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