{"_id":"6acab0caf47ffa9ea602bcf4","slug":"businessmans-wife-swindled-of-1350-lakh-after-being-kept-under-digital-arrest-for-10-days-allahabad-news-c-3-ald1034-994556-2026-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर कारोबारी की पत्नी से 13.50 लाख ठगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर कारोबारी की पत्नी से 13.50 लाख ठगे
विज्ञापन
लूकरगंज निवासी एक कारोबारी की पत्नी से साइबर ठगों ने 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 13.50 लाख रुपये ठग लिए।
ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
महिला ने पुलिस को बताया कि 29 सितंबर को उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुला है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संदीप कुमार से जुड़ी रकम आई है। महिला के इन्कार करने पर ठगों ने खाते में उनके आधार कार्ड के इस्तेमाल का दावा किया।
इसके बाद उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आने लगीं। कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली के बाराखंभा थाने का पुलिस अधिकारी बताया।
उन्होंने महिला को एफआईआर में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी और डिजिटल अरेस्ट कर ऑनलाइन सुनवाई का नाटक किया। ठगों ने केस से नाम हटाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का कथित पत्र भेजा। उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में 13.50 लाख रुपये जमा करने को कहा। धमकियों से डरकर महिला ने रकम ट्रांसफर कर दी, बाद में ठगी का अहसास होने पर साइबर पुलिस से शिकायत की।
विज्ञापन
पूर्व सीएमएस से ठगी
इसी तरह की एक घटना 26 अगस्त को जाॅर्जटाउन में हुई थी। वहां एक पूर्व महिला सीएमएस से करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 1.78 करोड़ रुपये ठगे गए थे। आरोपियों ने उन्हें पार्सल में ड्रग्स मिलने और आधार कार्ड संलग्न होने का दावा कर डराया था। पीड़िता ने बंगलूरू में रहने वाली अपनी बेटी को जानकारी दी, तब ठगी का पता चला। इस मामले में साइबर पुलिस ने एक अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाली कॉल से घबराएं नहीं
पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
आधार कार्ड, ओटीपी, बैंक विवरण और निजी दस्तावेज साझा न करें।
कॉल करने वाले की पहचान संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से सत्यापित करें और ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।
विज्ञापन
ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
महिला ने पुलिस को बताया कि 29 सितंबर को उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुला है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संदीप कुमार से जुड़ी रकम आई है। महिला के इन्कार करने पर ठगों ने खाते में उनके आधार कार्ड के इस्तेमाल का दावा किया।
विज्ञापन
इसके बाद उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आने लगीं। कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली के बाराखंभा थाने का पुलिस अधिकारी बताया।
उन्होंने महिला को एफआईआर में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी और डिजिटल अरेस्ट कर ऑनलाइन सुनवाई का नाटक किया। ठगों ने केस से नाम हटाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का कथित पत्र भेजा। उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में 13.50 लाख रुपये जमा करने को कहा। धमकियों से डरकर महिला ने रकम ट्रांसफर कर दी, बाद में ठगी का अहसास होने पर साइबर पुलिस से शिकायत की।
विज्ञापन
पूर्व सीएमएस से ठगी
इसी तरह की एक घटना 26 अगस्त को जाॅर्जटाउन में हुई थी। वहां एक पूर्व महिला सीएमएस से करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 1.78 करोड़ रुपये ठगे गए थे। आरोपियों ने उन्हें पार्सल में ड्रग्स मिलने और आधार कार्ड संलग्न होने का दावा कर डराया था। पीड़िता ने बंगलूरू में रहने वाली अपनी बेटी को जानकारी दी, तब ठगी का पता चला। इस मामले में साइबर पुलिस ने एक अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाली कॉल से घबराएं नहीं
पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
आधार कार्ड, ओटीपी, बैंक विवरण और निजी दस्तावेज साझा न करें।
कॉल करने वाले की पहचान संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से सत्यापित करें और ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।