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Prayagraj News: फायदे में बीपीसीएल, फिर भी ताला लगाने की तैयारी

Thu, 17 Sep 2020 12:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 17 Sep 2020 12:49 PM IST
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Prayagraj bpcl company naini allahabad will be shut down announcement in lok sabha by anurag thakur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
जिले में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रोजगार मुहैया कराने के लिए शुरू की गई नैनी स्थित भारत पंप्स एंड कंप्रेसर्स लिमिटेड (बीपीसीएल) पर जल्द ही ताला लग जाएगा। केंद्र सरकार ने इसकी घोषणा भी कर दी है, जिसके बाद कंपनी से जुड़े अफसर और कर्मचारी हतप्रभ हैं। सरकार का यह फैसला तब आया है जबकि कंपनी धीरे-धीरे घाटे से उबरते हुए लाभ की स्थिति में पहुंच रही है। इसके अलावा देश की कई कंपनियों ने अपने लिए इसकी उपयोगिता भी बताई है। 
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भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की छह कंपनियों पर ताला लगाने का निर्णय लिया है। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद में इसकी जानकारी दी है। इसमें 1970 में स्थापित नैनी स्थित बीपीसीएल भी शामिल हैं। इसके विपरीत अफसरों का दावा है कि विगत तीन वर्षों में कंपनी की कमाई लगातार बढ़ी है। अब यह कंपनी आत्मनिर्भर हो चुकी है। अफसरों का कहना है कि यदि कंपनी की पुरानी देनदारी को खत्म कर दिया जाए तो कभी मिनी नवरत्नों में शामिल बीपीसीएल एक बार फिर सरकार को लाभांश देने की स्थिति में होगी। यह भी कहना है कि कंपनी को चलाने के लिए सरकार को जो राशि देनी होगी, उसका पांच गुना इसे बंद करने पर खर्च करना होगा।
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तीन हजार से तीन सौ तक रह गए कर्मचारी

तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के प्रयास से 1966 में नैनी में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई थी। 1970 में भारत सरकार ने बीपीसीएल की स्थापना की। प्रदेश सरकार ने लीज पर जमीन दी। शुरुआती दिनों में तीन हजार कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी लेकिन रिटायमेंट के बाद नई भर्तियां नहीं हुईं। इसके अलावा विगत कुछ वर्षों से कंपनी घाटे में भी जाने लगी। अब कर्मचारियों की संख्या महज साढ़े तीन सौ रह गई है। इनमें भी नियमित कर्मचारियों की संख्या मात्र डेढ़ सौ है। मुख्य महाप्रबंधक रतन प्रकाश ने बताया कि करीब इतने ही संविदा पर कर्मचारी हैं। इसके अलावा 70 से 80 रिटायर कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति दी गई है।
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ओएनजीसी, आईओसी जैसी कंपनियां हैं ग्राहक

आईओसीएल, ओएनजीसी, एनपीसीआईएल आदि कंपनियों को बीपीसीएल से पंप एंड कंप्रेसर्स की आपूर्ति की जाती है। यहां के कंप्रेसर की कीमत एक करोड़ से 20 करोड़ रुपये तक है। पंप की भी कीमत तीन करोड़ रुपये तक है। इनके पार्ट्र्स की आपूर्ति बीपीसीएल से ही की जाती है। ओमान ंरिफाइनरी में भी बीपीसीएल के उपकरण लगाए गए हैं। आज भी पंप एवं कंप्रेसर का निर्माण करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कोई कंपनी नहीं है। 

पिछले साल 65 करोड़ का हुआ था कारोबार

0 पिछले वर्ष कंपनी ने 65 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। सीजीएम ने रतन प्रकाश ने बताया कि इस वर्ष 80 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य है। कोविड संक्रमण के बावजूद उन्होंने लक्ष्य पूरा होने की बात कही। इसी क्रम में एक अन्य अफसर ने बताया कि इस समय करीब 40 करोड़ रुपये का आर्डर मिला हुआ है। ओएनजीसी ने चार पंप का आर्डर दिया है। इनमें से दो तैयार हैं। दो अन्य भी जल्द तैयार हो जाएंगे। आईओसीएल, एनपीआईसीएल आदि कंपनियों से वार्ता चल रही है। 10 और पंप का आर्डर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी पाइप भी बनाती है। हल्दिया पाइप लाइन बिछाने में बीपीसीएल की भी हिस्सेदारी रही है।

2012 के बाद से नुकसान में आई कंपनी

एक समय देश के मिनी नवरत्नों में शामिल बीपीसीएल के घाटे में जाने के कई कारण हैं। जरूरत से ज्यादा स्टॉफ की नियुक्ति इसकी बड़ी वजह है। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि शुरुआती दिनों में तीन हजार कर्मचारी थे। वहीं अब करीब साढ़े तीन सौ कर्मचारियों से काम हो रहा है। इसका नतीजा है कि कंपनी पर सबसे अधिक देनदारी कर्मचारियों की है। इसके अलावा 2013 से स्थायी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) की नियुक्ति नहीं होना भी बीपीसीएल के गिरावट का कारण बना। केंद्र सरकार के निर्णय के तहत सीएमडी की नियुक्ति बीएचएल करेगी। टेक्रोलॉजी ईआईएल तथा आर्डर ओएनजीसी देगा। सीएमडी की नियुक्ति में 2012 तक सब ठीक रहा लेकिन इसके बाद नियुक्त सीएमडी का कार्यकाल कुछ महीनों का ही रहा। इसके अलावा तकनीकी अपग्रेडेशन और पंप एवं कंपेसर्स की मांग भी कम हो गई।

बंद करने पर चार अरब रुपये की होगी जरूरत

भारत सरकार कंपनी पर ताला लगाती है तो कर्मचारियों तथा अन्य मद में उसे करीब 400 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इसके विपरीत कंपनी को चालू रखने पर 80 करोड़ रुपये देने होंगे। सीजीएम रतन प्रकाश ने बताया कि रिटायर कर्मचारियों के भुगतान के लिए सरकार ने 111.59 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में दिए थे। उसका ब्याज ही कंपनी का बड़ा खर्च है। रामजी यादव का कहना है कि दो साल पहले तक कंपनी 39 करोड़ रुपये के घाटे में थी लेकिन अब यह कम होकर 19 करोड़ रह गए हैं। यह राशि भी सरकार को ब्याज के रूप में दी जाने वाली है। यदि सरकार अपना कर्ज और ब्याज छोड़ दे तो आज भी कंपनी फायदे में हैं। 

बीपीसीएल के पक्ष में लिखा है पत्र

सीजीएम के अनुसार ओएनजीसी, आईओसीएल तथा अन्य कंपनियों ने लिखकर दिया है कि बीपीसीएल को बंद नहीं किया जाना चाहिए। बीपीसीएल के पंप्स एवं कंप्रसर्स इन कंपनियों में लगे हैं। इनके पार्ट्र्स भी बीपीसीएल से मंगाए जाते हैं। बीपीसीएल के बंद होने से पहले के लगे पंप्स एवं कंपेसर्स के पार्ट्र्स को लेकर संकट खड़ा हो सकता है। 

डॉ. रीता के प्रयास से आई थी केंद्रीय टीम

पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा जोशी की पुत्री क्षेत्र से सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी ने बीपीसीएल को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनके प्रयास से उद्योग विभाग की केंद्रीय टीम ने बीपीसीएल का सर्वे किया। अफसरों के अनुसार टीम की रिपोर्ट भी बीपीसीएल को चलाने के पक्ष में थी। 

295 एकड़ में फैले बीपीसीएल के लिए नहीं आए खरीदार

बीपीसीएल में निवेश के भी प्रयास किए गए। इसके लिए तीन बार प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन कोई आगे नहीं आया। चूंकि बीपीसीएल पर देनदारी तो है ही, इसकी जमीन भी अपनी नहीं है। प्रदेश सरकार की है। यदि किसी दूसरे के हाथ में इसका स्वामित्व गया तो जमीन की कीमत भी प्रदेश सरकार को चुकानी होगी। यही कारण है कि 295 एकड़ में फैली कंपनी को लेने कोई आगे नहीं आया। 

  • ‘बीपीसीएल को बंद किए जाने की योजना फरवरी में ही बनने लगी थी। अब संसद सत्र शुरू होने के बाद इस पर बयान जारी हुआ है लेकिन हमारे पास लिखित में कुछ नहीं आया है। मुझे अब भी उम्मीद है कि कंपनी चलेगी। ओएनजीसी समेत कई कंपनियों ने से चलाने की वकालत की है। इसके अलावा चालू रखने के बजाय इसे बंद करने पर सरकार को पांच गुना तक खर्च पड़ेगा।’ रतन प्रकाश, सीजीएम

  • ‘इसे बंद करने के किसी फैसले का हम विरोध करते हैं। सरकार सिर्फ पुराना बकाया खत्म कर दे। आगे कंपनी को चलाने के लिए हमें किसी तरह की मदद नहीं चाहिए। एक-दो वर्षों में हम सरकार को लाभांश देने की भी स्थिति में होंगे। हम बीपीसीएल को ओएनजीसी में मर्ज करने की भी मांग करते हैं।’रामजी यादव, अध्यक्ष- कर्मचारी यूनियन

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