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बोस और बच्चन का खानदान एक? मुमकिन नहीं लगता!
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:20 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संस्था ग्लोबल रिसर्चर्स के शोध में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को एक ही परिवार के वंशज होने की संभावना पर कायस्थ समाज से जुड़े नामचीन हस्ताक्षरों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई ने इस संभावना से इनकार नहीं किया तो कई ने इस पर सवाल भी उठाए।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने माना कि यह संभावना हो सकती है। कहा, राजनीतिक क्षेत्र में शास्त्रीजी की सुभाष चंद्र बोस और हरिवंशराय बच्चनजी से मुलाकात हुई ही होगी। बोस, बंगाल के कायस्थ हैं। सभी कायस्थ भगवान चित्रगुप्त की ही संतान हैं। सभी कलम-दवात सहित उन्हें आराध्य के तौर पर पूजते हैं। तीनों एक ही बिरादरी से हैं। ऐसे में पूर्वजों से जोड़ें तो हो सकता है, हालांकि मुझे इनके बीच किसी रिश्ते के बारे में जानकारी नहीं है। कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह ने भी विस्तृत कायस्थ बिरादरी की बात कही। बोले, तीनों ही विभूतियां एक ही बिरादरी की हैं। विस्तार के क्रम में लोग अलग-अलग जगहों पर जा बसे। वैसे तो प्रामाणिक तौर पर आपस में तीनों विभूतियों के बीच किसी तरह के जुड़ाव की कोई जानकारी नहीं मिलती है। इसके बावजूद भगवान चित्रगुप्त की संतान होने से पीढ़ियों पहले वंशजों के बीच कोई जुड़ाव हो भी सकता है।
कायस्थ वृंद के संस्थापक धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने जोड़ा, सिर्फ शास्त्री, बोस और बच्चन ही क्यों बाबू राजेंद्र प्रसाद, मुशी प्रेमचंद सहित तमाम कायस्थ किसी न किसी आधार पर पीढ़ियों पहले एक दूसरे से किसी न किसी रिश्ते में जुड़े हो सकते हैं। यद्यपि कि आज हमारे पास इसे कहने को कोई ठोस आधार नहीं है। इसे हम अपनी विरासत की चूक कहें या कुछ और लेकिन आज तीन पीढ़ियों से ज्यादा की वंशावली से हम तकरीबन अनभिज्ञ हैं। कायस्थ समाज की वंशावली का सूक्ष्म अध्ययन करें तो जुड़ाव मिल भी सकता है। वहीं कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष टीपी सिंह ने इस संभावना पर सवाल उठाए। कहा, तीनों विभूतियों के बीच में किसी तरह के रिश्ते को जोड़ा ही नहीं जा सकता है। यह सच है कि कायस्थों की बिरादरी बहुत लंबी-चौड़ी है, लेकिन उक्त संभावना के लिए कोई आधार नहीं है। इसी तरह वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपा शंकर श्रीवास्तव ने भी कहा कि कलम की श्रेष्ठता वाले कायस्थों की बिरादरी भी बड़ी है लेकिन तीनों महानुभावों के बीच किसी तरह के नाते-रिश्ते या वंश के जुड़ाव की बात नहीं कही जा सकती है।
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हां, बोस, घोष, मित्रा, दत्ता और गुहा बंगाली कायस्थ हैं। सीधे तौर पर मैं शास्त्री जी या बच्चन जी से किसी रिश्ते के तहत नेताजी के जुड़ाव के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं, लेकिन एक ही जाति के होने के कारण उनके पूर्वजों के बीच कोई जुड़ाव हो भी सकता है, जैसा सभी में होता है।
0 कल्याण घोष
अध्यक्ष, बंगाली कल्चरल ऐंड वेलफेयर एसोसिएशन
संस्था ग्लोबल रिसर्चर्स की ओर से लंदन में हुए एक शोध में चौंकाने वाला दावा किया गया है। इसके मुताबिक सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक ही परिवार के वंशज हो सकते हैं। संभव है इन तीनों के वंशज सैकड़ों बरस पहले एक ही परिवार से जुड़े हों। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि तकरीबन एक हजार बरस या उससे भी पहले कन्नौज से पांच कुलीन कायस्थ बंगाल जा बसे थे। ये बाद में बोस, घोष, मित्रा, दत्ता और गुहा कहलाए। बहुत संभव है कि बंगाल के बोस और उत्तर प्रदेश के श्रीवास्तव एक ही पेड़ की दो शाखाएं हों, यानी बच्चन, शास्त्री और बोस दूर के रिश्तेदार हो सकते हैं।
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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने माना कि यह संभावना हो सकती है। कहा, राजनीतिक क्षेत्र में शास्त्रीजी की सुभाष चंद्र बोस और हरिवंशराय बच्चनजी से मुलाकात हुई ही होगी। बोस, बंगाल के कायस्थ हैं। सभी कायस्थ भगवान चित्रगुप्त की ही संतान हैं। सभी कलम-दवात सहित उन्हें आराध्य के तौर पर पूजते हैं। तीनों एक ही बिरादरी से हैं। ऐसे में पूर्वजों से जोड़ें तो हो सकता है, हालांकि मुझे इनके बीच किसी रिश्ते के बारे में जानकारी नहीं है। कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह ने भी विस्तृत कायस्थ बिरादरी की बात कही। बोले, तीनों ही विभूतियां एक ही बिरादरी की हैं। विस्तार के क्रम में लोग अलग-अलग जगहों पर जा बसे। वैसे तो प्रामाणिक तौर पर आपस में तीनों विभूतियों के बीच किसी तरह के जुड़ाव की कोई जानकारी नहीं मिलती है। इसके बावजूद भगवान चित्रगुप्त की संतान होने से पीढ़ियों पहले वंशजों के बीच कोई जुड़ाव हो भी सकता है।
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कायस्थ वृंद के संस्थापक धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने जोड़ा, सिर्फ शास्त्री, बोस और बच्चन ही क्यों बाबू राजेंद्र प्रसाद, मुशी प्रेमचंद सहित तमाम कायस्थ किसी न किसी आधार पर पीढ़ियों पहले एक दूसरे से किसी न किसी रिश्ते में जुड़े हो सकते हैं। यद्यपि कि आज हमारे पास इसे कहने को कोई ठोस आधार नहीं है। इसे हम अपनी विरासत की चूक कहें या कुछ और लेकिन आज तीन पीढ़ियों से ज्यादा की वंशावली से हम तकरीबन अनभिज्ञ हैं। कायस्थ समाज की वंशावली का सूक्ष्म अध्ययन करें तो जुड़ाव मिल भी सकता है। वहीं कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष टीपी सिंह ने इस संभावना पर सवाल उठाए। कहा, तीनों विभूतियों के बीच में किसी तरह के रिश्ते को जोड़ा ही नहीं जा सकता है। यह सच है कि कायस्थों की बिरादरी बहुत लंबी-चौड़ी है, लेकिन उक्त संभावना के लिए कोई आधार नहीं है। इसी तरह वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपा शंकर श्रीवास्तव ने भी कहा कि कलम की श्रेष्ठता वाले कायस्थों की बिरादरी भी बड़ी है लेकिन तीनों महानुभावों के बीच किसी तरह के नाते-रिश्ते या वंश के जुड़ाव की बात नहीं कही जा सकती है।
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हां, बोस, घोष, मित्रा, दत्ता और गुहा बंगाली कायस्थ हैं। सीधे तौर पर मैं शास्त्री जी या बच्चन जी से किसी रिश्ते के तहत नेताजी के जुड़ाव के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं, लेकिन एक ही जाति के होने के कारण उनके पूर्वजों के बीच कोई जुड़ाव हो भी सकता है, जैसा सभी में होता है।
0 कल्याण घोष
अध्यक्ष, बंगाली कल्चरल ऐंड वेलफेयर एसोसिएशन
संस्था ग्लोबल रिसर्चर्स की ओर से लंदन में हुए एक शोध में चौंकाने वाला दावा किया गया है। इसके मुताबिक सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक ही परिवार के वंशज हो सकते हैं। संभव है इन तीनों के वंशज सैकड़ों बरस पहले एक ही परिवार से जुड़े हों। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि तकरीबन एक हजार बरस या उससे भी पहले कन्नौज से पांच कुलीन कायस्थ बंगाल जा बसे थे। ये बाद में बोस, घोष, मित्रा, दत्ता और गुहा कहलाए। बहुत संभव है कि बंगाल के बोस और उत्तर प्रदेश के श्रीवास्तव एक ही पेड़ की दो शाखाएं हों, यानी बच्चन, शास्त्री और बोस दूर के रिश्तेदार हो सकते हैं।