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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Birju Maharaj: Kathak emperor, wherever he lived in the whole world, roots remained connected with Prayagraj

बिरजू महाराज : पूरी दुनिया में कहीं भी रहे कथक सम्राट, जड़ें प्रयागराज से ही जुड़ी रहीं

Mon, 17 Jan 2022 11:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 17 Jan 2022 11:16 PM IST
सार

संगम की रेती पर निश्छल मुस्कान और सुरीली आवाज़ के साथ कभी मंजीरा, कभी तबले पर थाप देते, कभी पखावज मिलाते तो कभी नवोदित कलाकारों के साथ किसी अभिभावक की तरह बातें करना अब सिर्फ यादों तक सिमट गया है।

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Birju Maharaj: Kathak emperor, wherever he lived in the whole world, roots remained connected with Prayagraj
Prayagraj News : बिरजू महाराज। फाइल फोटो - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

‘हमहूं इलाहाबाद के हयन, इलाहाबाद कय रहब’, कहने वाले कथक सम्राट पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज का यह अपनापन अब नहीं सुनने को मिलेगा। वैसे तो वह प्रयागराज के हर न्योते पर आए लेकिन संगम की रेती पर महाकुंभ के दौरान स्पिक मैके की पहल पर आयोजित संगीत महोत्सव में 14 फरवरी 2019 को अंतिम बार उनकी मौजूदगी और अपनत्व से भरे यह शब्द शहरियों के दिलोदिमाग में अब तक तारी हैं।

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संगम की रेती पर निश्छल मुस्कान और सुरीली आवाज़ के साथ कभी मंजीरा, कभी तबले पर थाप देते, कभी पखावज मिलाते तो कभी नवोदित कलाकारों के साथ किसी अभिभावक की तरह बातें करना अब सिर्फ यादों तक सिमट गया है। पंडित बिरजू महाराज का जाना संगमनगरी के संगीत प्रेमियों के लिए किसी आघात से कम नहीं। वह देश, दुनिया में कहीं भी रहे लेकिन जड़ें हंडिया से ही जुड़ी रहीं।
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कुंभ पर्व के दौरान आए बिरजू महाराज ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में हंडिया के बैरगिया नाले से लेकर लाक्षागृह तक कथक की कड़ियां जोड़ीं थीं। कथिकों के लिए ‘बैरगिया नाला जुलुम जोर, नौ कथिक नचावै तीन चोर/जब तबला बाजे धीन-धीन, तब एक के ऊपर तीन-तीन’ जैसी उक्ति कहते हुए उनका चेहरा कथक की कला और कमाल से दमक उठता था। कहते थे, हंडिया को जिस दिन कथक कहकर सजाया जाएगा, उस दिन मुझे सबसे ज्यादा खुशी मिलेगी। कामना है कि कथक पूजनीय बने।

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Birju Maharaj: Kathak emperor, wherever he lived in the whole world, roots remained connected with Prayagraj
Prayagraj News : 17सीटीवाई33-बिरजू महाराज के साथ उर्मिला शर्मा। फाइल फोटो। - फोटो : प्रयागराज

कथक का प्रमुख केंद्र नहीं बन सका हंडिया का किचकिला
हंडिया के किचकिला को कथक का प्रमुख केंद्र बनाने की कथक सम्राट बिरजू महाराज की इच्छा अधूरी ही रह गई। उनकी शिष्या और कथक केंद्र की निदेशक उर्मिला शर्मा ने गुरु की इच्छा को आगे बढ़ाते हुए ‘कथक भूमि’ किचकिला के गौरव को दोबारा लौटने के संकल्प के साथ वर्ष 2011 में ‘कथक माटी उत्सव’ की शुरुआत की थीे।

तय हुआ था कि केंद्र को आवासीय भी बनाया जाएगा ताकि दूरदराज के विद्यार्थी यहां रहकर प्रशिक्षण हासिल कर सकें। विद्यार्थियों को बिरजू महराज के ही शिष्य बारी-बारी से प्रशिक्षण देंगे, वहीं वह स्वयं भी कथक की बारीकियों से परिचित कराएंगे, ताकि माटी का संस्कार पाकर कथक और समृद्ध हो सके। शिष्या उर्मिला शर्मा को अपना राजदूत नियुक्त करते हुए उन्होंने इसे जारी रखने को कहा था, वह परंपरा आज भी जारी है। लेकिन, फिलहाल पहले चरण में किचकिला के सत्ती चौरा का जीर्णोद्धार करके उसे ‘कथक मंच’ का रूप ही दिया जा सका है।

Birju Maharaj: Kathak emperor, wherever he lived in the whole world, roots remained connected with Prayagraj
Prayagraj News : बिरजू महाराज के साथ शिष्यगण। फाइल फोटो। - फोटो : प्रयागराज

कथक की जननी है हंडिया की माटी

बिरजू महाराजा का हंडिया से उतना ही नाता है, जितना कथक से। बिरजू महाराज के वंशज ईश्वरी प्रसाद मिश्र हंडिया ब्लॉक के किचकिला ऋषिपुर के निवासी थे। ईश्वरी प्रसाद नटवरी नृत्य के जन्मदाता थे। जहरीले जंतु के काटने से ईश्वरी प्रसाद की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उसी स्थल पर उनकी पत्नी ने भी प्राण त्याग दिए थे।

उनकी याद में ग्रामीणों ने एक चबूतरे का निर्माण करके नटवरी कला के जन्मदाता को जीवंत कर दिया था। कालांतर में परिवार जीविकोपार्जन के लिए लखनऊ और बनारस के घराने से जुड़ गया। यद्यपि बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में ही हुआ था। लगभग पांच वर्ष पूर्व हंडिया के मानस हाल परिसर में तीन दिवसीय कथक महोत्सव का आयोजन करके बिरजू महाराज ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

साथ ही उस चबूतरे का जीर्णोद्धार कराया था। पूजन अर्चन के बाद उन्होंने कहा था कि धन्य है हंडिया की माटी जिसने एक नई विद्या को जन्म देने के लिए मुझे प्रेरित किया। उनके निधन पर अवकाश प्राप्त प्रवक्ता विजय नाथ पांडेय, विवेक तिवारी, योगेश्वर मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, संगमलाल शुक्ल, आशुतोष कहते हैं, बिरजू महाराज ने अपनी विद्या से देश ही नहीं, विदेशों में भी हंडिया की माटी को भी धन्य कर दिया है। 

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