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Prayagraj News: बिरहा और शास्त्रीय गायन ने बांधा समा
Sat, 31 Oct 2026 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 31 Oct 2026 02:06 AM IST
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सांस्कृतिक केंद्र में दीपावली शिल्प मेले की सांस्कृतिक संध्या में नाटक का मंचन करते कलाकार। अम
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित दीपावली शिल्प मेले की सांस्कृतिक संध्या शुक्रवार को रामायण के प्रसंगों, बिरहा की मिठास और शास्त्रीय संगीत के नाम रही। मंच पर भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों और राम-रावण युद्ध का सजीव मंचन हुआ। वहीं दूसरी ओर लोकगीतों और शास्त्रीय गायन ने दर्शकों को सुरों से जोड़े रखा।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीएमपी डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रो. आनंद कुमार श्रीवास्तव, केंद्र के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण परंपरा आर्ट्स, चंडीगढ़ की ओर से प्रस्तुत श्री रामलीला-गाथा मर्यादा की रही। जय प्रकाश भट्ट की लिखी इस प्रस्तुति का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया। राम-रावण युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया।
इसके बाद गोविंद पाल और उनके दल ने बिरहा गीत जीन छनन-छनन छनकावा, मोर जियरा तरसावा सुनाकर श्रोताओं को लोकधुनों से जोड़ दिया। वहीं ओंकार सिंह और उनके दल ने शास्त्रीय गीत मेरा मन बांध लीनो रे, बस में कीनो चतुर सुगढ़ सांवरो, तू जग में शरम रख मेरी और सांवली सुरतिया देखी जैसे गीतों से माहौल सुरमयी हो गया। कार्यक्रम के अंत में चंद्रवती शुक्ला ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया।
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संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीएमपी डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रो. आनंद कुमार श्रीवास्तव, केंद्र के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण परंपरा आर्ट्स, चंडीगढ़ की ओर से प्रस्तुत श्री रामलीला-गाथा मर्यादा की रही। जय प्रकाश भट्ट की लिखी इस प्रस्तुति का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया। राम-रावण युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया।
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इसके बाद गोविंद पाल और उनके दल ने बिरहा गीत जीन छनन-छनन छनकावा, मोर जियरा तरसावा सुनाकर श्रोताओं को लोकधुनों से जोड़ दिया। वहीं ओंकार सिंह और उनके दल ने शास्त्रीय गीत मेरा मन बांध लीनो रे, बस में कीनो चतुर सुगढ़ सांवरो, तू जग में शरम रख मेरी और सांवली सुरतिया देखी जैसे गीतों से माहौल सुरमयी हो गया। कार्यक्रम के अंत में चंद्रवती शुक्ला ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया।
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