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यूपी : जस्टिस देशवाल बोले- सोशल मीडिया पर लाइक्स बढ़ाने के बजाय मुकदमों की तैयारी पर ध्यान दें युवा वकील

Sat, 31 Oct 2026 03:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 31 Oct 2026 03:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायालय और अधिवक्ताओं के कामकाज को लेकर अधूरी और तोड़-मरोड़कर जानकारी पोस्ट करने वाले युवा वकीलों को नसीहत दी है।

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Justice Deshwal said: Young lawyers should focus on preparing for their cases rather than on increasing likes
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायालय और अधिवक्ताओं के कामकाज को लेकर अधूरी और तोड़-मरोड़कर जानकारी पोस्ट करने वाले युवा वकीलों को नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया पर लाइक्स बढ़ाने के बजाय अपनी पढ़ाई, कानूनी ज्ञान और मुकदमों की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। युवा वकील ही इस उच्च न्यायालय का भविष्य हैं और उन्हें अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगानी चाहिए।

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न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने एक जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कुछ युवा अधिवक्ताओं की सोशल मीडिया पोस्टों का संज्ञान लिया गया है। इसमें हाईकोर्ट और वकीलों के कामकाज पर टिप्पणियां की गई हैं। पोस्ट करने वाले अधिवक्ताओं ने यह नहीं सोचा कि अधूरी और तोड़-मरोड़कर पेश की गई जानकारी बार और बेंच के बीच अनावश्यक मतभेद पैदा कर सकती है।
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अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के अधिकांश न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता युवा वकीलों के भविष्य के लिए बेहतर माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यही युवा आगे चलकर वरिष्ठ अधिवक्ता और हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनेंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ अधिवक्ताओं की ओर से न्यायिक कार्य बाधित करने और अपने मामलों में बहस करने के इच्छुक वकीलों को जबरन रोकने पर नाराजगी भी जताई।
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कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखना केवल न्यायाधीशों का नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं का भी कर्तव्य है। बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी से उचित कदम उठाने की अपेक्षा जताते हुए जमानत अर्जी पर अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की।


न्यायालय से जनता का विश्वास कम होता है तो माफिया परेशान करने लगेंगे

कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं का समाज में सम्मान इसलिए है, क्योंकि जनता का उच्च न्यायालय में भरोसा है। यदि न्यायालय से जनता का विश्वास कम होता है तो माफिया और मनमाने सरकारी अधिकारी अधिवक्ताओं को परेशान करने लगेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी अधिवक्ता भी अधिवक्ता हैं और उनकी गरिमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी निजी अधिवक्ताओं की।

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