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क्वाड: जयशंकर-रुबियो समेत चार देशों के विदेश मंत्री हुए शामिल, हिंद-प्रशांत में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
Sat, 31 Oct 2026 11:31 PM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 31 Oct 2026 11:31 PM IST
सार
अमेरिका के अटलांटा में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्वाड बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षित सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा और नई तकनीकों पर चर्चा हुई।
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अमेरिका में मिले क्वाड देशों के विदेश मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका के अटलांटा में शनिवार यानी कि 31 अक्टूबर को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग मौजूद रहीं। यह बैठक जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर हुई।
बैठक में चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने में हुई प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही अगले महीने फिलीपींस की राजधानी मनीला में क्वाड देशों के नेताओं की बैठक आयोजित करने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इस समिट की मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसका आयोजन आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों के दौरान नवंबर के मध्य में प्रस्तावित है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर हुई चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि क्वाड देश अपनी साझा प्राथमिकताओं को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए वास्तविक लाभ में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चारों देशों के बीच भरोसेमंद और खुली सप्लाई चेन विकसित करने, नई पीढ़ी की तकनीकों को बढ़ावा देने, समुद्री सहयोग मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
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रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान मिलकर अपने नागरिकों और क्षेत्र के दूसरे देशों के लिए नतीजे देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्वाड अब केवल समस्याओं पर चर्चा करने वाला मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह ऐसा समूह बन चुका है, जहां सहयोग के क्षेत्रों की पहचान कर उन पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। रुबियो के मुताबिक, इस साल क्वाड देशों के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। जनवरी 2025 में विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी पहली बैठक भी क्वाड के साथ ही हुई थी।
ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका तनाव: बातचीत को लेकर नरम पड़े अराघची, बोले- युद्ध की आशंका से इनकार नहीं; हर हालात के लिए तैयार
इस साल तीसरी बार मिले क्वाड देशों के विदेश मंत्री
अटलांटा में हुई यह इस साल की तीसरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी। इससे पहले मई में नई दिल्ली और जुलाई में मनीला में चारों देशों के विदेश मंत्री मिले थे। अब अगले महीने क्वाड नेताओं की बैठक होने की तैयारी है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि क्वाड किसी देश के खिलाफ बना गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह न तो चीन विरोधी संगठन है और न ही किसी अन्य देश का विरोध करने के लिए बनाया गया मंच है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चारों देश कुछ गतिविधियों और व्यवहारों पर आपत्ति जताते हैं, जो उनके साझा हितों को प्रभावित करते हैं।
ईरान और समुद्री सुरक्षा पर भी बोले रुबियो
ईरान के मुद्दे पर रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले कर रहा है। इनमें भारतीय नाविकों को ले जाने वाले जहाज और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति करने वाले जहाज भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की गतिविधियों से पूरे क्षेत्र और दुनिया के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करना है। उन्होंने दावा किया कि ईरान समर्थित संगठन लेबनान, सऊदी अरब और इराक समेत मध्य पूर्व के कई देशों में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों का विरोध किया।
समुद्री सुरक्षा पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने दूसरे देशों से सहयोग मांगा है, लेकिन अब तक सीमित सहयोग ही मिला है। वहीं, काला सागर क्षेत्र में अनाज की आपूर्ति बहाल करने के प्रयासों में भारत और तुर्किये ने कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी समुद्री सीमाओं और क्षेत्रीय दावों से जुड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में क्वाड देश मिलकर समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए काम करते रहेंगे।
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बैठक में चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने में हुई प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही अगले महीने फिलीपींस की राजधानी मनीला में क्वाड देशों के नेताओं की बैठक आयोजित करने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इस समिट की मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसका आयोजन आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों के दौरान नवंबर के मध्य में प्रस्तावित है।
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर हुई चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि क्वाड देश अपनी साझा प्राथमिकताओं को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए वास्तविक लाभ में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चारों देशों के बीच भरोसेमंद और खुली सप्लाई चेन विकसित करने, नई पीढ़ी की तकनीकों को बढ़ावा देने, समुद्री सहयोग मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
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रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान मिलकर अपने नागरिकों और क्षेत्र के दूसरे देशों के लिए नतीजे देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्वाड अब केवल समस्याओं पर चर्चा करने वाला मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह ऐसा समूह बन चुका है, जहां सहयोग के क्षेत्रों की पहचान कर उन पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। रुबियो के मुताबिक, इस साल क्वाड देशों के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। जनवरी 2025 में विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी पहली बैठक भी क्वाड के साथ ही हुई थी।
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इस साल तीसरी बार मिले क्वाड देशों के विदेश मंत्री
अटलांटा में हुई यह इस साल की तीसरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी। इससे पहले मई में नई दिल्ली और जुलाई में मनीला में चारों देशों के विदेश मंत्री मिले थे। अब अगले महीने क्वाड नेताओं की बैठक होने की तैयारी है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि क्वाड किसी देश के खिलाफ बना गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह न तो चीन विरोधी संगठन है और न ही किसी अन्य देश का विरोध करने के लिए बनाया गया मंच है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चारों देश कुछ गतिविधियों और व्यवहारों पर आपत्ति जताते हैं, जो उनके साझा हितों को प्रभावित करते हैं।
ईरान और समुद्री सुरक्षा पर भी बोले रुबियो
ईरान के मुद्दे पर रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले कर रहा है। इनमें भारतीय नाविकों को ले जाने वाले जहाज और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति करने वाले जहाज भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की गतिविधियों से पूरे क्षेत्र और दुनिया के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करना है। उन्होंने दावा किया कि ईरान समर्थित संगठन लेबनान, सऊदी अरब और इराक समेत मध्य पूर्व के कई देशों में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों का विरोध किया।
समुद्री सुरक्षा पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने दूसरे देशों से सहयोग मांगा है, लेकिन अब तक सीमित सहयोग ही मिला है। वहीं, काला सागर क्षेत्र में अनाज की आपूर्ति बहाल करने के प्रयासों में भारत और तुर्किये ने कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी समुद्री सीमाओं और क्षेत्रीय दावों से जुड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में क्वाड देश मिलकर समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए काम करते रहेंगे।