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बिकरू कांड : विकास दुबे की पत्नी को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Tue, 05 Oct 2021 07:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 05 Oct 2021 07:49 PM IST
सार

मुकदमे की कार्यवाही और चार्जशीट में हस्तक्षेप से हाई कोर्ट का इनकार

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Bikru scandal: Vikas Dubel's wife did not get relief from High Court
allahabad highcourt - फोटो : prayagraj

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने दूसरे व्यक्ति का सिम कार्ड का इस्तेमाल कर कपट धोखाधड़ी के आरोप में दाखिल चार्जशीट, मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के आदेश व मुकदमे की कार्यवाही पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने ऋचा दुबे की याचिका पर दिया है।
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याचिका पर अधिवक्ता प्रभाशंकर मिश्र व राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बहस की। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची के खिलाफ एसआईटी रिपोर्ट पर कानपुर नगर के चौबेपुर थाने में   एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस चार्जशीट दाखिल होने के बाद रमाबाई नगर कानपुर देहात की विशेष अदालत में आपराधिक केस चल रहा है।
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मजिस्ट्रेट ने पुलिस चार्जशीट को संज्ञान में लेकर समन जारी किया है, जिसकी वैधता को चुनौती दी गई है। याची का कहना था कि उसके पास मोबाइल फोन नहीं है। जो नंबर वह इस्तेमाल कर रही है, वह उसके नौकर महेश का है। उसे कोई आपत्ति नहीं है। फ़ोन से कोई अपराध नहीं किया गया है। बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी होने के नाते झूठा फंसाया जा रहा है।
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3 जुलाई 20 को बिकरू गांव में शूटआउट में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। घटना से डरकर नौकर सीतापुर भाग गया और अपना मोबाइल फोन छोड़ गया। पुलिस ने तथ्यों पर विचार किए बगैर मैकैनिकल तरीके से चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट ने भी संज्ञान लेकर समन जारी किया है। पूरी कार्यवाही रद्द की जाए।



राज्य सरकार का कहना था कि 19 नवंबर 20 को याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। अनापत्ति लिए बगैर सिम याची के नाम कर लिया गया है जो कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन है। यह अपराध है। 2017 से ही याची महेश का मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुकदमे की कार्यवाही पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
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