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बिकरू कांड: रेखा अग्निहोत्री को जमानत पर रिहा करने से इनकार, छत पर खड़ी होकर पुलिस को ललकारने का है आरोप
Tue, 05 Oct 2021 10:18 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 05 Oct 2021 10:18 PM IST
सार
बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी महिला है और उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। प्राथमिकी में भी उसका नाम नहीं है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
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court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिकरू गांव कांड में आरोपी रेखा अग्निहोत्री की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। रेखा पर गांव में दबिश देने गई पुलिस पर हमला करने और उनको मार डालने के लिए ललकारने का आरोप है।
कोर्ट ने कहा कि बिकरूकांड में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई, छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए, याची पर पुलिस को मार डालने को ललकारने का गंभीर आरोप है। जिससे उसे जमानत पर रिहा करने का औचित्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने दिया है। मुठभेड़ में मार गिराए गए अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे की भी कोर्ट जमानत अर्जी खारिज कर चुकी है।
याची आरोपी दयाशंकर उर्फ कालू की पत्नी है, उसके खिलाफ कानपुर नगर के चौबेपुर थाने में हत्या, षड्यंत्र, हत्या के प्रयास, विस्फोटक कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। मुख्य आरोपी विकास दुबे भी मुठभेड़ में मारा जा चुका है। चश्मदीद गवाहों का बयान है कि याची मकान की छत पर खड़ी होकर कह रही थी कि पुलिस वालों को मार डालो, बचकर कोई जाने न पाए।
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इसके साथ कई अन्य महिलाएं भी ललकार रहीं थीं। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी महिला है और उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। प्राथमिकी में भी उसका नाम नहीं है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि बिकरूकांड में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई, छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए, याची पर पुलिस को मार डालने को ललकारने का गंभीर आरोप है। जिससे उसे जमानत पर रिहा करने का औचित्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने दिया है। मुठभेड़ में मार गिराए गए अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे की भी कोर्ट जमानत अर्जी खारिज कर चुकी है।
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याची आरोपी दयाशंकर उर्फ कालू की पत्नी है, उसके खिलाफ कानपुर नगर के चौबेपुर थाने में हत्या, षड्यंत्र, हत्या के प्रयास, विस्फोटक कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। मुख्य आरोपी विकास दुबे भी मुठभेड़ में मारा जा चुका है। चश्मदीद गवाहों का बयान है कि याची मकान की छत पर खड़ी होकर कह रही थी कि पुलिस वालों को मार डालो, बचकर कोई जाने न पाए।
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इसके साथ कई अन्य महिलाएं भी ललकार रहीं थीं। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी महिला है और उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। प्राथमिकी में भी उसका नाम नहीं है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है।