भंगेल बेगमपुर का मामला : नोएडा प्राधिकरण को भूमि अधिग्रहण मामले में अवमानना से छह साल बाद मिली मुक्ति
यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने राकेश कुमार अग्रवाल व अन्य और मनोरमा कुच्छल की ओर से नाेएडा प्राधिकरण के विरुद्ध दाखिल अवमानना याचिका को खारिज करते हुए दिया। मामला नोएडा के ग्राम भंगेल बेगमपुर की भूमि अधिग्रहण का है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को भूमि अधिग्रहण के मुआवजे काे लेकर चल रहे अवमानना के वाद से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहीत भूमि की मुआवजा राशि भूस्वामियों द्वारा लेने से इन्कार करने पर बैंक में जमा है। प्रयोग में नहीं आई भूमि भी प्राधिकरण लौटाने को तैयार है, इसलिए अवमानना का मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण के समक्ष याची मुआवजा बढ़ाने की मांग रख सकते हैं।
यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने राकेश कुमार अग्रवाल व अन्य और मनोरमा कुच्छल की ओर से नाेएडा प्राधिकरण के विरुद्ध दाखिल अवमानना याचिका को खारिज करते हुए दिया। मामला नोएडा के ग्राम भंगेल बेगमपुर की भूमि अधिग्रहण का है। 1989 में अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद से ही अदालती विवाद से घिरे रहे इस मामले में दशकों तक कई याचिकाएं दाखिल हुईं और याचियों के पक्ष में निस्तारित हुईं।
हर बार शिकस्त खाते प्राधिकरण ने तत्कालीन जिलाधिकारी से जमीनों का मूल्यांकन करवाया। इसमें याची मनोरमा की भूमि की कीमत एक करोड़ से ज्यादा आंकी गई। उक्त राशि को याची ने लेने से इन्कार कर दिया। प्राधिकरण ने उक्त धनराशि को राष्ट्रीकृत बैंक में जमा करवा दिया। साथ ही, यह शर्त भी मानी कि प्राधिकरण के लिए अनुपयोगी भूमि प्राधिकरण भू-स्वामियों को लौटने को भी तैयार है।
याचियों की ओर से अधिवक्ता राम कौशिक और नोएडा प्राधिकरण के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सेन और राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता पीके गिरी ने बहस की। याचियों का कहना था कि मनोरमा के पति जेबी कुच्छल ने अधिग्रहण प्रक्रिया को 1990 में ही चुनौती दी थी। उनकी याचिका पैरवी के अभाव में खारिज हो गई थी। इस दौरान 1999 में प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहीत कर ली, लेकिन 2007 में रिकॉल प्रार्थना पत्र के जरिए याचिका पुनर्जीवित होने के बाद स्वीकृत हुई।
नोटिफिकेशन रद्द करने के साथ ही कोर्ट ने प्राधिकरण को उचित मुआवजा देने को आदेश दिया था। याचियों का आरोप था कि प्राधिकरण ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना कर कार्यवाही की जाए। प्राधिकरण की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामा के आलोक में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2017 से लंबित अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया। इससे नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को अवमानना वाद से मुक्ति भी मिल गई है।