{"_id":"68526a727c7a2ad0f500f9c5","slug":"bareilly-district-cooperative-bank-clerk-ranjit-kumar-gets-relief-sentence-cancelled-2025-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : बरेली के जिला सहकारी बैंक के क्लर्क रणजीत कुमार को मिली राहत, दंडादेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : बरेली के जिला सहकारी बैंक के क्लर्क रणजीत कुमार को मिली राहत, दंडादेश रद्द
Wed, 18 Jun 2025 12:57 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 18 Jun 2025 12:57 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बरेली के क्लर्क को अनुशासनात्मक कार्यवाही में मिली सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बरेली के क्लर्क को अनुशासनात्मक कार्यवाही में मिली सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने रणजीत कुमार की याचिका पर दिया।
विज्ञापन
याची को 20 दिसंबर 2021 को निलंबित कर दिया गया था। उन पर एक खाताधारक को 70 हजार के आहरण पर 69,500 रुपये का भुगतान करने का आरोप लगाया गया। कैश गिनते समय 400 रुपये कम पाए गए। ग्राहकों से उधार लिया, जिससे बैंक की छवि धूमिल हुई। बिना किसी सूचना या अवकाश के अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया। इन सब मामलों में आरोप पत्र जारी किया गया और जांच अधिकारी ने याची को दोषी पाया।
विज्ञापन
उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 28 फरवरी 2023 को बैंक की प्रबंधन समिति के निर्णय के अनुसार सचिव/मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने याची के दो वेतन वृद्धियों को रोकने की सजा सुनाई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि अधिकारी के आदेश में कारण न बताने से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने 28 फरवरी 2023 के आदेश को रद्द कर दिया। वहीं, प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को सुनवाई का आवश्यक अवसर प्रदान करने के बाद नए सिरे से तर्कपूर्ण और सुविचारित आदेश पारित करें।