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बैंक एकाउंट, संपत्ति भी खंगालनी होगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 26 Dec 2017 01:02 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल के दौरान हुई तमाम बड़ी परीक्षाओं की कॉपियां भले ही नष्ट कर दी गई हों लेकिन जांच के लिए सीबीआई के पास बहुत कुछ होगा। सीबीआई अगर फर्जी तरीके से चयनित अभ्यर्थियों या उनके करीबियों को बैंक एकाउंट खंगाले और पिछले दस वर्षों में आयोग के कर्मचारियों एवं कुछ पदाधिकारियों और अफसरों की संपत्ति की जांच कर लें तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ सकती है। ऐसा मानना है कि प्रतियोगी छात्रों का, जो लगातार मांग कर रहे हैं कि भर्तियों में हुई धांधली की जांच सीबीआई शीघ्र शुरू करे।
आयोग यह बात जनसूचना अधिकार के तहत मान चुका है कि वर्ष 2012 या उससे पहले हुई पीसीएस परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं जबकि सीबीआई जांच में अहम भूमिका कॉपियों की ही होगी। ऐसे में सीबीआई के लिए जांच आसान नहीं होगी। इसके बावजूद जांच के लिए कई दूसरे बिंदु भी हैं। सीबीआई जांच का आदेश होने से पहले प्रतियोगी छात्र लगातार आरोप लगाते रहे कि आयोग के कुछ पदाधिकारियों एवं अफसरों ने नियुक्ति के लिए मोटी रकम ली। इसमें कुछ कर्मचारी भी शामिल थे। इस पूरे प्रकरण में दलालों की भूमिका भी अहम रही। ऐसे में सीबीआई जांच के दौरान अगर इस बात की जांच की जाए कि जिन भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोप लगे हैं, उन परीक्षाओं के लिए हुए इंटरव्यू के आसपास के दिनों में चयनित अभ्यर्थियों या या उनके करीबियों के खाते से कितनी रकम निकाली गई। प्रतियोगियों का कहना है कि अगर किसी के खाते से 20 से 30 लाख रुपये निकाले गए और उनसे पूछताछ की जाती है तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
इसके अलावा आयोग के कुछ कर्मचारियों, अफसरों और पदाधिकारियों की संपत्ति में अचानक तेजी से इजाफा हुआ। किसी ने अपने नाम से तो किसी ने परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम से संपत्ति अर्जित की। कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने फॉर्म हाउस तक खरीद लिए। सीबीआई को यह जांच भी करनी चाहिए कि ऐसे कर्मचारियों, अफसरों और पदाधिकारियों की संपत्ति में अचानक इतनी बढ़ोतरी कहां से हुई। वहीं, उन दलालों की संपत्ति खंगाली जानी चाहिए, जो आयोग में लगातार सक्रिय रहे और कुछ सदस्यों के संपर्क में बने रहे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि सिर्फ कॉपियां नष्ट कर देने से भ्रष्टाचारी नहीं बच सकेंगे। सीबीआई अगर सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच करती है तो प्रतियोगियों के कॅरियर से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्टाचारियों को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता।
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आयोग यह बात जनसूचना अधिकार के तहत मान चुका है कि वर्ष 2012 या उससे पहले हुई पीसीएस परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं जबकि सीबीआई जांच में अहम भूमिका कॉपियों की ही होगी। ऐसे में सीबीआई के लिए जांच आसान नहीं होगी। इसके बावजूद जांच के लिए कई दूसरे बिंदु भी हैं। सीबीआई जांच का आदेश होने से पहले प्रतियोगी छात्र लगातार आरोप लगाते रहे कि आयोग के कुछ पदाधिकारियों एवं अफसरों ने नियुक्ति के लिए मोटी रकम ली। इसमें कुछ कर्मचारी भी शामिल थे। इस पूरे प्रकरण में दलालों की भूमिका भी अहम रही। ऐसे में सीबीआई जांच के दौरान अगर इस बात की जांच की जाए कि जिन भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोप लगे हैं, उन परीक्षाओं के लिए हुए इंटरव्यू के आसपास के दिनों में चयनित अभ्यर्थियों या या उनके करीबियों के खाते से कितनी रकम निकाली गई। प्रतियोगियों का कहना है कि अगर किसी के खाते से 20 से 30 लाख रुपये निकाले गए और उनसे पूछताछ की जाती है तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
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इसके अलावा आयोग के कुछ कर्मचारियों, अफसरों और पदाधिकारियों की संपत्ति में अचानक तेजी से इजाफा हुआ। किसी ने अपने नाम से तो किसी ने परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम से संपत्ति अर्जित की। कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने फॉर्म हाउस तक खरीद लिए। सीबीआई को यह जांच भी करनी चाहिए कि ऐसे कर्मचारियों, अफसरों और पदाधिकारियों की संपत्ति में अचानक इतनी बढ़ोतरी कहां से हुई। वहीं, उन दलालों की संपत्ति खंगाली जानी चाहिए, जो आयोग में लगातार सक्रिय रहे और कुछ सदस्यों के संपर्क में बने रहे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि सिर्फ कॉपियां नष्ट कर देने से भ्रष्टाचारी नहीं बच सकेंगे। सीबीआई अगर सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच करती है तो प्रतियोगियों के कॅरियर से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्टाचारियों को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता।
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