बांग्ला नववर्ष : बंगीय संस्कृति की बिखरी सतरंगी छटा, राघब चटर्जी ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल बनाया यादगार
पद्मश्री पं. अजय चक्त्रस्वर्ती और उस्ताद रशीद खान से संगीत की शिक्षा लेने वाले राघब के मंच पर आते ही पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। उन्होंने कई गीत सुनाए। इसमें तोमार कथा भेवे आमार रात हो जाए...।
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बांग्ला नववर्ष उत्सव पर शुक्रवार की शाम बंगीय व्यंजनों, कला-संस्कृतियों, परिधानों और गीतों से यादगार बन गई। कोलकाता से आए मशहूर गायक राघब चटर्जी के गीतों पर लोग झूम उठे। इस दौरान उन्होंने एक से बढ़कर एक कई गीतों की प्रस्तुति की। यह कार्यक्रम प्रयाग संगीत समिति के प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था।
पद्मश्री पं. अजय चक्रवर्ती और उस्ताद रशीद खान से संगीत की शिक्षा लेने वाले राघव के मंच पर आते ही पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। उन्होंने कई गीत सुनाए। इसमें तोमार कथा भेवे आमार रात हो जाए...। चांद केनो आसे ना घोरे, मोन मेंघे संगीते, झिरी झिरी, पोरदेसी मेघ जाओ रे धीरे, केसरिया बालमा पधारो म्हारे देश के अलावा कई फिल्मी गीतों और सूफी तरानों से उन्होंने संगीत रसिकों को मुग्ध कर दिया। इनके साथ संगत की स्नेहिंदु चटर्जी, सोमनाथ राय, दीपतेंदु बनर्जी, विश्व देव विश्वास, सिंटू दास, उमश कुशवाहा, सौरभ कुमार मंडल ने।
इससे पहले गेस्ट ऑफ ऑनर से लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. अनूप बनर्जी को नवाजा गया। उन्होंने समाज को और सुदृढ़ बनाने के लिए युवाओं का आह्वान किया। कहा कि युवा ही असली ताकत हैं। ऐसे में उनका जिम्मेदारी बढ़ जाती है। युवाओं को चाहिए कि वे आगे आएं और समाज के निचले तबके के लोगों की सहायता करें। अतिथियों का स्वागत बंगाली सोशल और कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज बनर्जी और चीफ एडवाइजर आलोक बनर्जी ने किया।
गुरुदेव रवींद्रनाथ के गीत की हुई प्रस्तुति
इसके बाद सचिव शंकर चटर्जी ने संस्था का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। इस दौरान गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के गीत एशो हे बोइशाख एशो एशो... की प्रस्तुति की गई। इस मौके पर डॉ. अमिताभ घोष, डॉ. राधारानी घोष, डॉ. प्रबाल नियोगी, प्रदीप मुखर्जी, अंजन चटर्जी, सुखमय मित्रा, दिलीप दत्ता, राणा चंदा, अमित नियोगी, देवराज चटर्जी, अरिंदम घोष, ज्योतिर्मयी चटर्जीए सुब्रत सेन, गोपाल बोस, असीम राय, ध्रुव दास गुप्ता और देवव्रत साहा उपस्थित थे। पुरुष कुर्ता -पायजामा, धोती-कुर्ता में महिलाएं साड़ी पहन कर इस उत्सव का हिस्सा बनीं। इस दौरान बंगीय व्यंजनों में मालपुआ, पेठा, रसगुल्ला, संदेश का स्वाद चखा गया।
युवा प्रतिभाओं को किया सम्मानित
दरभंगा कॉलोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में शुक्रवार को बांग्ला नववर्ष पर विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां की गईं। बंगीय कला -संस्कृति को दर्शाने वाले पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति की गई। इस दौरान युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।