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बीएचयू कुलपति सहित छह अधिकारियों पर अवमानना का आरोप तय
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पूर्व कुलपति, कुलपति, कुलसचिव सहित सभी से छह सप्ताह में स्पष्टीकरण तलब
मेडिकल फेकल्टी में भर्ती के मामले में हाईकोर्ट के आदेश की जानकर की अवहेलना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति, पूर्व कुलपति और कुलसचिव तथा उपकुलसचिव सहित छह अधिकारियों पर अवमानना का आरोप तय किया है। इन सभी पर हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का आरोप है। कोर्ट ने सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने इन अधिकारियों से पूछा है कि क्यों ना उनको अदालत के आदेश की अवमानना में दंडित किया जाए। सभी अधिकारियों को छह सप्ताह में स्पष्टीकरण हाईकोर्ट को देने को कहा गया है। अदालत ने इस आदेश के अनुपालन के लिए हाईकोर्ट के महानिबंधक को निर्देशित किया है।
डॉ. संदीप कुमार और चार अन्य की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया है। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में आर्थोपेडिक और एनाटॉमी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। विश्वविद्यालय ने विज्ञापन में अतिरिक्त अर्हता जोड़ी है, जो मेडिकल काउंसिल और यूजीसी के मानकों के अनुरूप नहीं है। बताया गया कि नीति एवं योजना बोर्ड ने अतिरिक्त योग्यता तय की थी, जो कि विज्ञापन में जोड़ी गई, जबकि बोर्ड को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
इस पर हाईकोर्ट ने विज्ञापन रद्द कर दिया तथा विश्वविद्यालय को नए सिरे से विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने नियुक्त किए गए एक प्रोफेसर को पद से हटाया नहीं और ना ही कोई नया विज्ञापन जारी किया। इसके खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के तीन फरवरी 2014 और 17 फरवरी 2014 के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है, जिसके लिए उनके विरुद्ध अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट ने सभी को अवमानना का दोषी करार देते हुए स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। याचिका की सुनवाई 16 जनवरी 2020 को होगी।
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इन पर तय हुआ आरोप
हाईकोर्ट ने बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह, वर्तमान कुलपति राकेश भटनागर, रजिस्ट्रार डॉ. जीएस यादव, डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी और उप कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है कि क्यों न उन पर अवमानना का केस चलाकर दंडित किया जाए।
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मेडिकल फेकल्टी में भर्ती के मामले में हाईकोर्ट के आदेश की जानकर की अवहेलना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति, पूर्व कुलपति और कुलसचिव तथा उपकुलसचिव सहित छह अधिकारियों पर अवमानना का आरोप तय किया है। इन सभी पर हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का आरोप है। कोर्ट ने सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने इन अधिकारियों से पूछा है कि क्यों ना उनको अदालत के आदेश की अवमानना में दंडित किया जाए। सभी अधिकारियों को छह सप्ताह में स्पष्टीकरण हाईकोर्ट को देने को कहा गया है। अदालत ने इस आदेश के अनुपालन के लिए हाईकोर्ट के महानिबंधक को निर्देशित किया है।
डॉ. संदीप कुमार और चार अन्य की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया है। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में आर्थोपेडिक और एनाटॉमी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। विश्वविद्यालय ने विज्ञापन में अतिरिक्त अर्हता जोड़ी है, जो मेडिकल काउंसिल और यूजीसी के मानकों के अनुरूप नहीं है। बताया गया कि नीति एवं योजना बोर्ड ने अतिरिक्त योग्यता तय की थी, जो कि विज्ञापन में जोड़ी गई, जबकि बोर्ड को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
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इस पर हाईकोर्ट ने विज्ञापन रद्द कर दिया तथा विश्वविद्यालय को नए सिरे से विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने नियुक्त किए गए एक प्रोफेसर को पद से हटाया नहीं और ना ही कोई नया विज्ञापन जारी किया। इसके खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के तीन फरवरी 2014 और 17 फरवरी 2014 के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है, जिसके लिए उनके विरुद्ध अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट ने सभी को अवमानना का दोषी करार देते हुए स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। याचिका की सुनवाई 16 जनवरी 2020 को होगी।
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इन पर तय हुआ आरोप
हाईकोर्ट ने बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह, वर्तमान कुलपति राकेश भटनागर, रजिस्ट्रार डॉ. जीएस यादव, डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी और उप कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है कि क्यों न उन पर अवमानना का केस चलाकर दंडित किया जाए।