फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ban on ongoing departmental proceedings based on criminal case, response sought from government

High Court : आपराधिक मुकदमे के आधार पर जारी विभागीय कार्यवाही पर रोक, सरकार से जव ाब तलब

Sun, 08 Sep 2024 06:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Sep 2024 06:51 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुधीर कुमार सिंह, गौरव सिंह, यशवीर सिंह, हरीश कुमार, योगेश कुमार, राजीव चौधरी, दीपक कुमार सिंह, इमरान खान व अन्य पुलिसकर्मियों की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम को सुनकर दिया है।

विज्ञापन
Ban on ongoing departmental proceedings based on criminal case, response sought from government
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभिन्न जिलों के इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे के आधार पर जारी विभागीय कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से जवाब तलब किया है।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुधीर कुमार सिंह, गौरव सिंह, यशवीर सिंह, हरीश कुमार, योगेश कुमार, राजीव चौधरी, दीपक कुमार सिंह, इमरान खान व अन्य पुलिसकर्मियों की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम को सुनकर दिया है।
विज्ञापन


मामला गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी, मैनपुरी, सिद्धार्थनगर, बस्ती, आगरा, गोरखपुर एवं प्रयागराज में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर, दरोगा, हेड कांस्टेबल एवं कांस्टेबलों का है। याचियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार व अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज है। इन्हीं क्रिमिनल केस के आरोपों के संबंध में उप्र पुलिस अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम 14(1) के तहत विभागीय कार्यवाही करते हुए आरोप पत्र भी निर्गत किए गए हैं। इन पुलिसकर्मियों ने विभागीय कार्यवाही को चुनौती दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचियों के अधिवक्ता विजय गौतम एवं अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम ने दलील दी कि जिन आरोपों में याचियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है, उन्हीं आरोपों के संबंध में विभागीय कार्यवाही की जा रही है। आपराधिक मामले एवं विभागीय कार्यवाही के आरोप व साक्ष्य एक समान हैं। पुलिस रेग्यूलेशन के पैरा 483, 486, 489, 492 एवं 493 के मुताबिक पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आपराधिक केस होने पर उन्हीं आरोपों में विभागीय कार्यवाही तब तक नहीं की जा सकती, जब तक क्रिमिनल केस में ट्रायल पूरा न हो जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed