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यूपी में बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी से फिलहाल मिली राहत, हाईकोर्ट ने विद्युत नियामक आयोग से जवाब मांगा
Mon, 28 Jun 2021 10:39 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 28 Jun 2021 10:39 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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यूपी में बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी से फिलहाल राहत मिल गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उ प्र राज्य विद्युत नियामक आयोग को अंतिम रूप से टैरिफ पुनरीक्षित करने से रोक दिया है। आयोग 19मई को वर्चुअल लोक सुनवाई के आधार पर टैरिफ को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है। कोर्ट ने आयोग से इस मामले में दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिका की सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने अरविंद अग्रवाल व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि आयोग ने 21अप्रैल 21 व 10 मई 21को टैरिफ पुनरीक्षित करने का प्रस्ताव किया है, जो नियम विरुद्ध होने के कारण रद्द किया जाए। कानून व रेग्युलेशन में टैरिफ निर्धारण की विधिक प्रक्रिया दी गई है। जिसके अनुसार दो अखबारो में पब्लिक नोटिस प्रकाशित कर जनसुनवाई के बाद ही टैरिफ तय किया जा सकता है।
आयोग ने 21 अप्रैल के नोटिस पर पांव मई 21 को होने वाली जन सुनवाई कोविड 19 प्रकोप के कारण टाल दी। फिर 10 मई को नोटिस जारी कर 19 मई को सुनवाई की तिथि तय की गई। उस समय कोरोना पीक पर था। इसके बावजूद वर्चुअल सुनवाई की खाना पूरी कर टैरिफ को अंतिम मंजूरी देने की तैयारी की जा रही है। याची को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।ऐसा न कर टैरिफ को अंतिम रूप देना विधि विरूद्ध है। कोर्ट ने प्रकरण विचारणीय माना और टैरिफ तय करने पर रोक लगाते हुए आयोग से जवाब मांगा है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने अरविंद अग्रवाल व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि आयोग ने 21अप्रैल 21 व 10 मई 21को टैरिफ पुनरीक्षित करने का प्रस्ताव किया है, जो नियम विरुद्ध होने के कारण रद्द किया जाए। कानून व रेग्युलेशन में टैरिफ निर्धारण की विधिक प्रक्रिया दी गई है। जिसके अनुसार दो अखबारो में पब्लिक नोटिस प्रकाशित कर जनसुनवाई के बाद ही टैरिफ तय किया जा सकता है।
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आयोग ने 21 अप्रैल के नोटिस पर पांव मई 21 को होने वाली जन सुनवाई कोविड 19 प्रकोप के कारण टाल दी। फिर 10 मई को नोटिस जारी कर 19 मई को सुनवाई की तिथि तय की गई। उस समय कोरोना पीक पर था। इसके बावजूद वर्चुअल सुनवाई की खाना पूरी कर टैरिफ को अंतिम मंजूरी देने की तैयारी की जा रही है। याची को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।ऐसा न कर टैरिफ को अंतिम रूप देना विधि विरूद्ध है। कोर्ट ने प्रकरण विचारणीय माना और टैरिफ तय करने पर रोक लगाते हुए आयोग से जवाब मांगा है।
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