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High Court : अर्दली बाजार स्थित भवन ध्वस्तीकरण पर रोक, भू अधिग्रहण कर सकते हैं प्राधिकारी अधिकारी
Sun, 07 Jan 2024 12:36 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 07 Jan 2024 12:36 PM IST
सार
याची का कहना था कि याची के पिता निजामुद्दीन के नाम भवन के एक हिस्से का 13 दिसंबर 1995 का बैनामा है। जिसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई है। वह भवन स्वामी होने के नाते कब्जे में है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के अर्दली बाजार निवासी याची के आवास के ध्वस्तीकरण व बेदखली के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि याची के आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही प्राधिकारी अधिकारी भू अधिग्रहण कर सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने फखरूद्दीन कुरैशी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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याची का कहना था कि याची के पिता निजामुद्दीन के नाम भवन के एक हिस्से का 13 दिसंबर 1995 का बैनामा है। जिसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई है। वह भवन स्वामी होने के नाते कब्जे में है। विकास प्राधिकरण जिला अदालत से सन्दहा रोड वाया आशापुर का चौड़ीकरण कर रहा है। याची की जमीन का न तो अधिग्रहण किया गया है और न ही अधिकारियों के साथ उसका कोई करार हुआ है। जबरन उसके मकान को ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है।
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राज्य सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि राजस्व अभिलेखों में भवन व जमीन महाराजा बनारस के नाम दर्ज है। बैनामा करने वाले का जमीन पर स्वामित्व नहीं था, इसलिए याची को जमीन का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। अन्य भवन स्वामियों से सड़क चौड़ीकरण के हक में करार हो चुका है। याची से करार की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बैनामा निरस्त करने के लिए कोई वाद लंबित नहीं है। ऐसे में याची की आपत्ति सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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