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Prayagraj News: आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी ससुरालीजनों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक
Mon, 25 Aug 2025 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 25 Aug 2025 02:46 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न व आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति व ससुरालीजनों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही मृतका के परिजनों को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत ने बरेली निवासी नरेंद्र सिंह व अन्य की ओर से ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है।
मामला शेरगढ़ थाना क्षेत्र का है। विवाहिता ने पांच नवंबर 2024 को मायके में आत्महत्या की थी। इसके बाद उनके परिजनों ने पति समेत अन्य ससुराल के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान सुसाइड नोट को आधार बना कर ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इसका संज्ञान लेते हुए ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे पति व अन्य के अधिवक्ता विपिन गंगवार ने दलील दी कि दहेज उत्पीड़न के आरोप झूठे और सामान्य प्रकृति के हैं।
कथित सुसाइड नोट में केवल इतना लिखा है कि मृतका ससुराल में खुश नहीं थी। कोर्ट ने मामले की विचारणीय मानते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। अब मामले की सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
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मामला शेरगढ़ थाना क्षेत्र का है। विवाहिता ने पांच नवंबर 2024 को मायके में आत्महत्या की थी। इसके बाद उनके परिजनों ने पति समेत अन्य ससुराल के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान सुसाइड नोट को आधार बना कर ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इसका संज्ञान लेते हुए ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे पति व अन्य के अधिवक्ता विपिन गंगवार ने दलील दी कि दहेज उत्पीड़न के आरोप झूठे और सामान्य प्रकृति के हैं।
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कथित सुसाइड नोट में केवल इतना लिखा है कि मृतका ससुराल में खुश नहीं थी। कोर्ट ने मामले की विचारणीय मानते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। अब मामले की सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
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