{"_id":"5765af9c4f1c1bdd5a11b6fb","slug":"ballast-sand-boulder-game-of-millions-in-contracts","type":"story","status":"publish","title_hn":"गिट्टी, बालू, बोल्डर के ठेके में लाखों का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गिट्टी, बालू, बोल्डर के ठेके में लाखों का खेल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 19 Jun 2016 02:16 AM IST
विज्ञापन
money
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला पंचायत में गिट्ठी, बोल्डर, बालू एवं मोरम वाहन की नीलामी के ठेके में जिला पंचायत में जमकर मनमानी हुई। नतीजा कि सरकारी कोष को 22 लाख 72 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। सिर्फ यही नहीं, 7.15 लाख की रायल्टी कटौती न करने से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंची और ठेकेदारों को उतनी धनराशि का अनियमित भुगतान कर दिया गया। यह खुलासा अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र को कार्यालय प्रधान महालेखाकार उत्तर प्रदेश की ओर से जनसूचना अधिकार के तहत सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
ऑडिट टीम ने अभिलेखों की जांच में पाया कि गिट्टी, बारा तहसील में 69 लाख 27 हजार रुपये का बोल्डर एवं वाहन शुल्क का ठेका अप्रैल 2012 से मार्च 2013 तक के लिए संजय कुमार और तहसील चायल में बालू, मोरम एवं वाहन शुल्क का आठ लाख 37 हजार का ठेका राजेंद्र प्रसाद को दिया गया। इसके बाद तहसील बारा में रामकृष्ण सिंह को नवंबर 2013 से मार्च 2014 तक के लिए गिट्टी, बोल्डर एवं वाहन शुल्क का 13 लाख 28 हजार रुपये और तहसील चायल में राजेंद्र प्रसाद को अक्तूबर 2013 से मार्च 2014 तक के लिए राजेंद्र प्रसाद को बालू, मोरम एवं वाहन शुल्क का दो लाख रुपये का ठेका दिया गया।
ऑडिट टीम ने इस पर आपत्ति लगाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिना किसी कारण के वित्तीय वर्ष 2013 में पूर्ण अवधि का ठेका नहीं दिया गया। बारा में वित्तीय वर्ष 2012-13 में 69 लाख 27 हजार रुपये में ठेका दिया गया था। इस आधार पर वर्ष 2013-14 में पांच माह के लिए 28 लाख 86 हजार 250 रुपये पर 15 फीसदी बढ़ाकर यानी 33 लाख 149 हजार 187 रुपये में ठेका दिया जाना चाहिए था, लेकिन जिला पंचायत ने महज 13 लाख 28 हजार रुपये में ठेका दे दिया। ठीक इसी तरह की गड़बड़ी तहसील चायल में भी ठेका देने में की गई। इस तरह कुल 22 लाख 72 हजार 462 रुपये की हानि हुई।
विज्ञापन
ऑडिट आपत्ति पर तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी ने जवाब दिया कि ठेके के प्रस्ताव पर अध्यक्ष ने इस आधार पर रोक लगा दी थी कि दरों में संशोधन किया जाएगा और नीलामी तक विभागीय वसूली की जाएगी। 2013-14 में खनन पर रोक होने के कारण गिट्टी, बालू, मोरम, वाहन शुल्क की नीलामी कम हुई। ऑडिट टीम ने इस उत्तर को खारिज कर दिया, क्योंकि दर संशोधित किए जाने के समर्थन में कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही वर्ष 2013-14 में खनन पर रोक के संबंध में कोई अभिलेख प्रस्तुत किया गया।
विज्ञापन
ऑडिट टीम ने अभिलेखों की जांच में पाया कि गिट्टी, बारा तहसील में 69 लाख 27 हजार रुपये का बोल्डर एवं वाहन शुल्क का ठेका अप्रैल 2012 से मार्च 2013 तक के लिए संजय कुमार और तहसील चायल में बालू, मोरम एवं वाहन शुल्क का आठ लाख 37 हजार का ठेका राजेंद्र प्रसाद को दिया गया। इसके बाद तहसील बारा में रामकृष्ण सिंह को नवंबर 2013 से मार्च 2014 तक के लिए गिट्टी, बोल्डर एवं वाहन शुल्क का 13 लाख 28 हजार रुपये और तहसील चायल में राजेंद्र प्रसाद को अक्तूबर 2013 से मार्च 2014 तक के लिए राजेंद्र प्रसाद को बालू, मोरम एवं वाहन शुल्क का दो लाख रुपये का ठेका दिया गया।
विज्ञापन
ऑडिट टीम ने इस पर आपत्ति लगाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिना किसी कारण के वित्तीय वर्ष 2013 में पूर्ण अवधि का ठेका नहीं दिया गया। बारा में वित्तीय वर्ष 2012-13 में 69 लाख 27 हजार रुपये में ठेका दिया गया था। इस आधार पर वर्ष 2013-14 में पांच माह के लिए 28 लाख 86 हजार 250 रुपये पर 15 फीसदी बढ़ाकर यानी 33 लाख 149 हजार 187 रुपये में ठेका दिया जाना चाहिए था, लेकिन जिला पंचायत ने महज 13 लाख 28 हजार रुपये में ठेका दे दिया। ठीक इसी तरह की गड़बड़ी तहसील चायल में भी ठेका देने में की गई। इस तरह कुल 22 लाख 72 हजार 462 रुपये की हानि हुई।
विज्ञापन
ऑडिट आपत्ति पर तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी ने जवाब दिया कि ठेके के प्रस्ताव पर अध्यक्ष ने इस आधार पर रोक लगा दी थी कि दरों में संशोधन किया जाएगा और नीलामी तक विभागीय वसूली की जाएगी। 2013-14 में खनन पर रोक होने के कारण गिट्टी, बालू, मोरम, वाहन शुल्क की नीलामी कम हुई। ऑडिट टीम ने इस उत्तर को खारिज कर दिया, क्योंकि दर संशोधित किए जाने के समर्थन में कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही वर्ष 2013-14 में खनन पर रोक के संबंध में कोई अभिलेख प्रस्तुत किया गया।