बज्म ए विरासत : बांसुरी वादक पं. हरि प्रसाद चौरसिया बोले- आज जो कुछ भी हूं वह बांसुरी की वजह से
हरि प्रसाद ने कहा कि मेरा जन्म इलाहाबाद हुआ है, लेकिन यहां आकर लगा कि मेरा जन्म यहां नहीं हुआ है। मुंबई और इलाहाबाद में कोई फर्क नहीं है। अब तीन सुंदर पवित्र नदियां दिखाई दे रही हैं। पहले तो दिखती ही नहीं थी।
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प्रयागराज में जन्मे प्रख्यात बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया का मानना है कि इलाहाबाद (अब प्रयागराज) काफी बदल गया है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले और अब की तुलना की जाए तो अपना इलाहाबाद बहुत ही खूबसूरत हो गया है। शहर की धड़कन कहे जाने वाले लोकनाथ की गलियों में अब अंधेरा नहीं रहा। पहले जब मैं यहां पढ़ाई करता था तो लगता था कि इन गलियों में फंस गया हूं। हरि प्रसाद चौरसिया ने यह संस्मरण शुक्रवार को बिशप जानसन स्कूल एंड कॉलेज में आयोजित बज्म ए विरासत महोत्सव में साझा की। महोत्सव में हरि प्रसाद ने अपनी बांसुरी का भले ही हुनर न दिखाया हो लेकिन उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर स्मिता अग्रवाल से चर्चा की।
स्मिता अग्रवाल ने कहा हम सबके लिए हरि प्रसाद जी एक प्रसाद की तरह हैं। वर्ष 1938-48 तक इलाहाबाद रहे। उस संस्मरण को याद करते हुए क्या कहेंगे? इस पर हरि प्रसाद ने कहा कि मेरा जन्म इलाहाबाद हुआ है, लेकिन यहां आकर लगा कि मेरा जन्म यहां नहीं हुआ है। मुंबई और इलाहाबाद में कोई फर्क नहीं है। अब तीन सुंदर पवित्र नदियां दिखाई दे रही हैं। पहले तो दिखती ही नहीं थी।
हरि प्रसाद बोले- नहीं लगता था पढ़ाई में मन
सवाल करते हुए पूछा कि आप पहलवानी के माहौल से निकले हैं। अखाड़ों से निकलकर बांसुरी तक खिचांव कैसे हुआ? जवाब में हरि प्रसाद ने कहा कि इलाहाबाद के अग्रवाल कॉलेज में पढ़ाई हुई थी। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। स्कूल के प्रधानाचार्य केदारनाथ गुप्ता ऐसे ही पास कर देते थे। इसी तरह बांसुरी बजाने लगा। इसके बाद लूकरगंज में एक टाइपिस्ट के यहां काम करने लगा। जितना बोलता था उतना टाइप कर देता था। फिर काम के दौरान भी बांसुरी बजाया करता था।
18 वर्ष की उम्र में स्टेट गवर्नमेंट की नौकरी मिल गई। उसमें भी मन नहीं लगा। इसके बाद बांसुरी ही मेरी पढ़ाई बन गई। नौकरी की वजह से ओडिशा ट्रांसफर हो गया था। फिर एक रेडियों में बांसुरी बजाया था। धीरे-धीरे लोग जानते गए। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद से ज्यादा सुंदर दूसरा कोई शहर नहीं है। पहले बिजली घर के पास डर लगता था। लेकिन, अब तो लगता है कि मुंबई छोड़कर यहीं वापस आ जाऊं।
लंतरानी ने लोगों का किया जमकर मनोरंजन
बिशप जॉनसन स्कूल एंड कॉलेज में 20 दिसंबर से तीन दिवसीय बज्म-ए-विरासत में सितारों की महफिल सजी। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित हरी प्रसाद चौरसिया ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। पहले दिन का मुख्य आकर्षण लंतरानी रहा। जिसमें साहित्यकार यश मालवीय, प्रो. धनंजय चोपड़ा, बाबा अभय अवस्थी, कमर आगा, इसमें दारागंज, लोकनाथ और पुराने शहर की चर्चाएं होंगी। पुराने इलाहाबाद के किस्से और कहानियां में चर्चा में अभय अवस्थी, प्रो. धनंजय चोपड़ा, कमर आगा और आसिफ उस्मानी आदि ने इलाहाबादी लंतरानी के माध्यम से लोगों का जमकर मनोरंजन किया।