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हत्या के प्रयास, मारपीट व षड़यंत्र में अतीक के करीबी की जमानत अर्जी खारिज
Thu, 13 Apr 2023 01:26 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 13 Apr 2023 01:26 AM IST
सार
इलाहाबाद जिला न्यायालय की विशेष अदालत (एमपीएमएलए) डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ल ने हत्या के प्रयास, मारपीट व आपराधिक षड़यंत्र में अतीक के करीबी मोहम्मद अमन पुत्र नफीस की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इलाहाबाद जिला न्यायालय की विशेष अदालत (एमपीएमएलए) डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ल ने हत्या के प्रयास, मारपीट व आपराधिक षड़यंत्र में अतीक के करीबी मोहम्मद अमन पुत्र नफीस की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि याची पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उसने आठ लोगों के साथ वादी मुकदमा और उसकी कार पर हमला किया। मामले में याची सहित अन्य सह अभियुक्तों पर सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। लिहाजा, वह जमानत का हकदार नहीं है।
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मामले में अतीक और उसके पुत्र अली सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। याची सहित अन्य सभी सह अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने मोहम्मद जीशान और उसके मित्र आचल कुमार भारतीया व नाजिम की कार पर हमला बोल दिया। तीनों ने केले के खेत में भागकर अपनी जान बचाई।
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- फोटो : सोशल मीडिया
आरोपियों ने जान से मारने की नियत से फायरिंग की। घटना के मामले में वादी मुकदमा जीशान ने थाना पुरामुफ्ती में 31 जुलाई 2022 को प्राथमिकी भी दर्ज कराई है। याची की ओर से तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। वह निर्दोष है और साजिशन उसका नाम प्राथमिकी में लिखाया गया है।
वादी मुकदमा माफिया अतीक का रिश्तेदार है और कार्रवाई से बचने के लिए प्रशासन के इशारे पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। सहायक शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य और वादी मुकदमा के अधिवक्ता विक्रम सिन्हा ने तर्क दिया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से जान से मारने की नियत से हमला किया। याची का आपराधिक इतिहास है। लिहाजा, जमानत अर्जी खारिज की जाए।
वादी मुकदमा माफिया अतीक का रिश्तेदार है और कार्रवाई से बचने के लिए प्रशासन के इशारे पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। सहायक शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य और वादी मुकदमा के अधिवक्ता विक्रम सिन्हा ने तर्क दिया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से जान से मारने की नियत से हमला किया। याची का आपराधिक इतिहास है। लिहाजा, जमानत अर्जी खारिज की जाए।