बहादुरगंज अग्निकांड : मेरे जीवनभर की पूंजी जल रही है, मुझे भी इसी आग में जल जाने दो
बहादुरगंज निवासी दोना-पत्तल व्यापारी विनोद केसरवानी के घर में बने गोदाम में शनिवार को आग लगने से सबकुछ जलकर राख हो गया। जिस घर व व्यापार को उन्होंने पाई-पाई जोड़कर बनाया था, उसको अपनी आंखों के सामने जलता हुआ देख वह जान की परवाह किए बिना आग में कूदे जा रहे थे। फायर ब्रिगेड की टीम जब उन्हें जबरन वहां से बाहर निकालने लगी, तब बिलखते हुए व्यवसायी का कहना था कि मेरे जीवनभर की पूंजी आंखों के सामने जल रही है, मुझे भी इस आग में जल जाने दो।
शनिवार को विनोद केसरवानी की यह पीड़ा सुनकर पास-पड़ोस के लोग भी भावुक हो गए। जिस समय घर में आग लगी उस समय सिर्फ विनोद और उनकी पत्नी दोनों दूसरे तल पर मौजूद थे। आग सबसे पहले भूतल पर लगी। इसलिए दूसरे तल पर मौजूद पति-पत्नी को आग लगने का पता ही नहीं चला।
घर में धुंए का गुबार उठता देख पास-पड़ोस के लोग बाहर से आवाज लगाते रहे, लेकिन अंदर के कमरे में होने की वजह से उन्हें कुछ सुनाई नहीं दिया। जिस घर में आग लगी, उससे सटा बेबी चौरसिया का भी घर है। बेबी ने बताया कि जब घर में से धुआं उठने लगा, तब अपनी छत की बाउंड्री को तोड़कर वह शोर मचाने लगीं। कुछ देर बाद विनोद की पत्नी ऊपर आईं तो उन्हें किसी तरह बाहर निकाला गया, लेकिन विनोद अंदर ही फंसे रह गए। उन्हें बुलाया जाता रहा, लेकिन वह घर से निकले को तैयार नहीं थे।
उधर, तब तक आग दूसरे तल पर पहुंच चुकी थी। व्यापारी आग की लपटों के बीच बालकनी में खड़े रहे और अपनी आंखों के सामने जिंदगीभर की मेहनत से खड़े किए गए कारोबार को धू-धूकर जलता देखते रहे। तब तक फायर ब्रिगेड की टीम भी उन्हें वहां से सुरक्षित बचाने के लिए सीढि़यों के सहारे से बगल की छत से उनके पास पहुंच गई, लेकिन विनोद वहां से हटने को तैयार नहीं थे। कुछ ही देर बाद धुंए से उनकी सांस फूलने लगी और वह नीचे बैठ गए। फायर ब्रिगेड कर्मी और पड़ोसियों की मदद से उन्हें बगल की छत से नीचे उतारा गया। उन्हें एंबुलेंस से एसआरएन अस्पताल ले जाया जा रहा था कि तभी रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।