फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Avoid adverse remarks against subordinate judges, orders removal of words containing personal criticism

High Court : अधीनस्थ जजों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी से बचें, निजी आलोचना वाले शब्द हटाने का आदेश

Wed, 15 Oct 2025 03:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 15 Oct 2025 03:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जज भी हाड़मांस से बने नश्वर प्राणी हैं। उसमें भी मानवीय गुण विद्यमान रहते हैं। वे कानून के अनुसार न्याय करते हैं। जजों को बिना पक्ष रखने का अवसर दिए अधीनस्थ जज के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

विज्ञापन
Avoid adverse remarks against subordinate judges, orders removal of words containing personal criticism
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जज भी हाड़मांस से बने नश्वर प्राणी हैं। उसमें भी मानवीय गुण विद्यमान रहते हैं। वे कानून के अनुसार न्याय करते हैं। जजों को बिना पक्ष रखने का अवसर दिए अधीनस्थ जज के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने से बचना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने शामली उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष याची की कार्यप्रणाली को लेकर राज्य उपभोक्ता आयोग की अपमानजनक टिप्पणी को हटा दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने शामली उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष रहे हेमंत कुमार गुप्ता की राज्य उपभोक्ता आयोग की प्रतिकूल टिप्पणी को हटाने की मांग में दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

विज्ञापन


याची ने डीलर रिलायंस रिटेल लिमिटेड व भारतीय जीवन बीमा निगम के केस में उसके खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग की अनुचित टिप्पणी को चुनौती दी थी। याची ने शामली में रहने के दौरान 600 शिकायतें सुनीं। दो मामलों में अपील की सुनवाई करते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग ने याची की कार्यप्रणाली को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और कहा कि जजों को अधीनस्थ के खिलाफ निजी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायहित व निष्पक्ष कार्यवाही के लिए की गई टिप्पणी आदेश से हटाई जाए।

विज्ञापन
Trending Videos

हाईकोर्ट ने तहसीलदार घोसी के विरुद्ध जारी किया जमानती वारंट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ जिले के तहसीलदार घोसी धर्मेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही सीजेएम मऊ को अगली तिथि पर विपक्षी की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने सत्यव्रत राय शास्त्री की अवमानना याचिका पर दिया है। मऊ के तहसील घोसी के ग्राम बड़ागांव में गाटा संख्या 987 क्षेत्रफल 0.044 हेक्टेयर जो राजस्व अभिलेख में पोखरी के रूप में दर्ज है। इस पर एक व्यक्ति ने अतिक्रमण कर लिया है। तहसीलदार घोसी ने अपने आदेश 31 अक्तूबर 2023 को बेदखली आदेश पारित किया था।

आदेश का अनुपालन न होने पर अमिला निवासी सत्य व्रत राय शास्त्री ने याचिका दाखिल की, जिसे निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने पोखरी पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए तहसीलदार घोसी को आदेश दिया था। इसका पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई है। याची की अवमानना अर्जी पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद तहसीलदार हाजिर नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया है। अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed