फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Avadheshanand Maharaj: Story removes confusion, fear and doubt, attaining renunciation through satsang

अवधेशानंद महाराज : भ्रम, भय, संशय का निवारण करती है कथा, सत्संग से वैराग्य, विवेक से ज्ञान की प्राप्ति संभव

Wed, 08 Jan 2025 06:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Jan 2025 06:45 PM IST
सार

स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि कथा का फल वही है जो समस्त प्रकार के भ्रम, भय, संशय का निवारण कर हमें एकात्मकता का अनुभव कराए है। भगवान का साकार रूप संत ही हैं। देव और पितरों का आशीर्वाद, मनुष्य के पुण्य कर्म जब फलित होते हैं, तब ही जीवन में संत अथवा गुरु का आगमन होता है।

विज्ञापन
Avadheshanand Maharaj: Story removes confusion, fear and doubt, attaining renunciation through satsang
स्वामी अवधेशानंद, आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद सरस्वती ने बुधवार को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य पर विस्तार से रोशनी डाली। सेक्टर-18 स्थित अपने प्रभु प्रेमी संघ शिविर में श्रीमद भागवत कथा के प्रसंगों के विवेचन में उन्होंने कहा कि भजन के बिना सुख-शांति की प्राप्ति संभव नहीं है।

विज्ञापन

स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि कथा का फल वही है जो समस्त प्रकार के भ्रम, भय, संशय का निवारण कर हमें एकात्मकता का अनुभव कराए है। भगवान का साकार रूप संत ही हैं। देव और पितरों का आशीर्वाद, मनुष्य के पुण्य कर्म जब फलित होते हैं, तब ही जीवन में संत अथवा गुरु का आगमन होता है। कथा के प्रथम स्कंध में प्रवेश करते हुए गुरुदेव ने कहा कि प्रणाम, लोकाचार, शिष्टाचार और सदाचार की प्रथम अभिव्यक्ति है, इसलिए आओ सब मिलकर गुरु को प्रणाम करें।

विज्ञापन

सत्संग का महत्व परिभाषित करते हुए श्लोक पढ़ा कि- सत्संगत्वे निस्संगत्वं, निस्संगत्वे निर्मोहत्वं। निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तिः। यानी सत्संग से वैराग्य, वैराग्य से विवेक, विवेक से स्थिर तत्त्वज्ञान और तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति अथवा जीवन की मुक्ति होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि एक साधक के लिए आध्यत्मिक गलियारे में प्रथम साधन श्रवण है। सर्वप्रथम हमें श्रोत्रिय ब्रम्हानिष्ठ सदपुरुषों को सुनना आना चाहिए। मानव देह प्राप्त होना भगवदीय अनुग्रह ही है, उस के बाद यदि आप मुमुक्षु हैं और आप को कृपा से गुरु का सानिध्य प्राप्त है तो निःसंदेह आप का कल्याण निश्चित है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed