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प्रो. रामसेवक का इस्तीफा, प्रो. उपाध्याय बने चीफ प्रॉक्टर
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au proctor professor Ram Sevak dubey resigned
- फोटो : ALDCOMPACT
पूर्व कुलपति के कार्यकाल में भी प्रो. रामसेवक ने दिया था इस्तीफा
ऑटा अध्यक्ष के साथ चीफ प्रॉक्टर के पद को लेकर उठते रहे सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। कुलपति प्रो. आरआर तिवारी ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. आरके उपाध्याय को चीफ प्रॉक्टर के पद पर नियुक्त कर दिया। शाम पांच बजे प्रो. उपाध्याय ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया।
पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इविवि से जाने के बाद विवि प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे उनके करीबियों को हटाए जाने का सिलसिला तेज हो गया है। डीएसडब्ल्यू, एफआरसी निदेशक के बाद अब नए चीफ प्रॉक्टर की नियुक्ति कर दी गई। चीफ प्रॉक्टर बने प्रो. आरके उपाध्याय इससे पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। प्रो. राम सेवक दुबे की चीफ प्रॉक्टर के पद पर नियुक्ति प्रो. हांगलू के कार्यकाल में हुई थी। प्रो. हांगलू के कार्यकाल में भी उन्होंने कई बार इस्तीफा दिया, लेकिन स्वीकार नहीं हुआ। हालांकि, जब प्रो. हांगलू का ऑडियो टेप प्रकरण सामने आया था, तब प्रो. राम सेवक दुबे की जगह प्रो. एचएस उपाध्याय को चीफ प्रॉक्टर बना दिया गया था और उसी वक्त छात्रसंघ का चुनाव हुआ था। इसके बाद प्रो. दुबे फिर चीफ प्रॉक्टर बने गए थे।
प्रो. हांगलू ने जब इस्तीफा दिया, उस वक्त भी प्रो. राम सेवक दुबे ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। लेकिन, इस बार त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। प्रो. दुबे ऑटा अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में चीफ प्रॉक्टर जैसा प्रशासनिक पद भी उनके पास होने के मामले में अक्सर सवाल उठते रहे। छात्रों तो सवाल उठाते ही रहे, प्रो. हांगलू के कार्यकाल में यहां जांच करने आई कमेटी ने भी इस मसले पर सवाल उठाए थे। प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए दिया है, क्योंकि प्रो. डीसी लाल ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है और अब वह एक अभियुक्त हैं। ऐसे में वह प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते।
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ऑटा अध्यक्ष के साथ चीफ प्रॉक्टर के पद को लेकर उठते रहे सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। कुलपति प्रो. आरआर तिवारी ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. आरके उपाध्याय को चीफ प्रॉक्टर के पद पर नियुक्त कर दिया। शाम पांच बजे प्रो. उपाध्याय ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया।
पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इविवि से जाने के बाद विवि प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे उनके करीबियों को हटाए जाने का सिलसिला तेज हो गया है। डीएसडब्ल्यू, एफआरसी निदेशक के बाद अब नए चीफ प्रॉक्टर की नियुक्ति कर दी गई। चीफ प्रॉक्टर बने प्रो. आरके उपाध्याय इससे पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। प्रो. राम सेवक दुबे की चीफ प्रॉक्टर के पद पर नियुक्ति प्रो. हांगलू के कार्यकाल में हुई थी। प्रो. हांगलू के कार्यकाल में भी उन्होंने कई बार इस्तीफा दिया, लेकिन स्वीकार नहीं हुआ। हालांकि, जब प्रो. हांगलू का ऑडियो टेप प्रकरण सामने आया था, तब प्रो. राम सेवक दुबे की जगह प्रो. एचएस उपाध्याय को चीफ प्रॉक्टर बना दिया गया था और उसी वक्त छात्रसंघ का चुनाव हुआ था। इसके बाद प्रो. दुबे फिर चीफ प्रॉक्टर बने गए थे।
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प्रो. हांगलू ने जब इस्तीफा दिया, उस वक्त भी प्रो. राम सेवक दुबे ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। लेकिन, इस बार त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। प्रो. दुबे ऑटा अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में चीफ प्रॉक्टर जैसा प्रशासनिक पद भी उनके पास होने के मामले में अक्सर सवाल उठते रहे। छात्रों तो सवाल उठाते ही रहे, प्रो. हांगलू के कार्यकाल में यहां जांच करने आई कमेटी ने भी इस मसले पर सवाल उठाए थे। प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए दिया है, क्योंकि प्रो. डीसी लाल ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है और अब वह एक अभियुक्त हैं। ऐसे में वह प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते।
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