इलाहाबाद विवि : संगीत सीख रहे छात्रों के भविष्य का AU प्रशासन ने बजा दिया ढोल, बीए चतुर्थ वर्ष का रोका रिजल्ट
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के फरमान के खिलाफ बीपीए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने परीक्षा नियंत्रक और संगीत प्रदर्शन विभाग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर परिणाम घोषित करने की मांग की है। विवि प्रशासन के रवैये से छात्र-छात्राओं में गहरी नाराजगी है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन ने चार वर्षीय बैचलर ऑफ परफारमिंग आर्ट्स (बीपीए) के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का परिणाम रोक दिया है। छात्रों को कोरोना महामारी की वजह से 2021-22 में प्रमोट किया गया था, बावजूद इसके उन्हें अब तृतीय वर्ष की परीक्षा देने का फरमान सुनाया गया है। इसमें उत्तीर्ण होने पर ही उन्हें डिग्री मिलेगी। इससे वह उच्च कक्षाओं में दाखिला भी नहीं ले सकेंगे, जबकि कई छात्र इसके टेस्ट तक पास कर चुके हैं।
विश्वविद्यालय के फरमान के खिलाफ बीपीए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने परीक्षा नियंत्रक और संगीत प्रदर्शन विभाग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर परिणाम घोषित करने की मांग की है। विवि प्रशासन के रवैये से छात्र-छात्राओं में गहरी नाराजगी है। दरअसल, कोविड की वजह से सत्र 2021-22 में विश्वविद्यालय ने बीपीए के स्नातक प्रथम व द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया था। तृतीय वर्ष की परीक्षा कराई थी। इससे तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को तो डिग्री मिल गई, लेकिन चार वर्षीय पाठ्यक्रम वाले फंस गए।
विद्यार्थियों के मुताबिक चार वर्षीय बीपीए पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों की परीक्षा कराने को लेकर विश्वविद्यालय ने कोई आदेश नहीं दिया था। लिहाजा, सत्र 2021-22 में बीपीए चतुर्थ वर्ष की परीक्षा तो कराई गई, लेकिन तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को प्रमोट करके चतुर्थ वर्ष में दाखिला दे दिया गया। पूरे साल पढ़ाई के बाद इनकी चतुर्थ वर्ष की परीक्षा भी हो चुकी है, लेकिन ऐन वक्त पर इसका परिणाम रोक दिया गया है। विद्यार्थियों को कहा जा रहा है कि पहले तृतीय वर्ष की परीक्षा दो, तब डिग्री मिलेगी।
विश्वविद्यालय का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब तमाम विद्यार्थी दूसरे संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए कैंपस छोड़ने की तैयारी कर चुके हैं। कई ने बीएचयू समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं की परास्नातक कक्षाओं की प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। बीएचयू ने सफल छात्रों को अगले हफ्ते काउंसलिंग के लिए बुलाया है। लेकिन, डिग्री के अभाव में वह दाखिले से वंचित रह जाएंगे।
छात्र बोले-किसी सूरत नहीं देंगे तीसरे वर्ष की परीक्षा
छात्रों का कहना है कि 2021-22 में परीक्षा के लिए तैयार थे, लेकिन तब ली नहीं गई। अब चतुर्थ वर्ष के बाद तृतीय वर्ष की परीक्षा कराने की बात कही जा रही है। यह हास्यास्पद है। छात्रों का कहना है कि अब वे किसी भी सूरत में तृतीय वर्ष की परीक्षा नहीं देंगे। वे तृतीय वर्ष में प्रमोट किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि विवि प्रशासन के बीच भ्रम की स्थिति का खामियाजा आखिर वह लोग क्यों भरें?
दो शिक्षकों के निधन से फैला भ्रम, पर देनी होगी परीक्षा : इविवि
विश्वविद्यालय की पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि उस समय विभाग के दो वरिष्ठ शिक्षकों की असामयिक मृत्यु के कारण छात्रों में परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति रही। इसी कारण इनकी परीक्षा नहीं कराई गई, जबकि यह होनी थी। यह बात सामने आने के बाद परीक्षा समिति ने तृतीय वर्ष की परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। ताकि, इन्हें भविष्य में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।