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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Attack carried out to save a life deemed an act of self-defense; life sentences of two brothers set aside.

Prayagraj : जान बचाने में किया गया हमला आत्मरक्षा का हिस्सा, दो भाइयों की उम्रकैद की सजा माफ

Wed, 08 Jul 2026 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Jul 2026 08:07 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पहले हुई हत्या में मिली उम्रकैद से दो सगे भाइयों को बरी कर दिया। कहा कि जान बचाने के लिए किया गया हमला आत्मरक्षा का हिस्सा है।

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Attack carried out to save a life deemed an act of self-defense; life sentences of two brothers set aside.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पहले हुई हत्या में मिली उम्रकैद से दो सगे भाइयों को बरी कर दिया। कहा कि जान बचाने के लिए किया गया हमला आत्मरक्षा का हिस्सा है। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने टीकम सिंह उनके बेटे चितेंद्र और मुनेश की ओर से सजा के खिलाफ दाखिल अपील स्वीकार करते हुए सुनाया है।

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मामला मुरादाबाद के बनियाठेर थाना क्षेत्र का है। चार अगस्त 1986 को मुरादाबाद के विजयपुर गांव में जमीन के विवाद में दो पक्षों में मारपीट हुई थी। आरोप लगा कि टीकम सिंह ने बेटे चितेंद्र सिंह और मुनेश के साथ हथियारबंद होकर रामवीर सिंह पर हमला कर दिया। इससे रामवीर सिंह की मौत हो गई थी। 23 दिसंबर 1987 को ट्रायल कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ इन्हाेंने हाईकोर्ट का रुख किया।

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कोर्ट ने माना कि टीकम सिंह घटना के समय बुजुर्ग हो चुके थे। साथ ही शारीरिक रूप से दिव्यांग थे। उन पर रामवीर के पक्ष ने हमला किया। इसमें उन्हें 20 चोटें आई थीं। टीकम सिंह के बेटे चितेंद्र और मुनेश ने अपने पिता की जान बचाने के लिए आत्मरक्षा में बल का प्रयोग किया था, जो कानूनन सही है।

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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन घटना का असली कारण और टीकम सिंह को आई चोटों के बारे में सच छिपा रहा था। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी न होना भी अभियोजन के दावों पर सवाल खड़ा करता है। मुख्य आरोपी टीकम सिंह की अपील के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। लिहाजा, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए चितेंद्र सिंह और मुनेश को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

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