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संगम पर पानी के साथ बढ़ा प्रदूषण, फिर मरा पक्षी
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Dec 2014 12:08 AM IST
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जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भले ही दावा करे लेकिन गंगा-यमुना में प्रदूषण कम होने के नाम नहीं ले रहा है। माघ मेला के मद्देनजर पीछे से छोड़े जा रहे पानी से जलस्तर बढ़ने लगा है। मंगलवार को सुबह जलस्तर में इजाफा हुआ तो गंगा में पानी का रंग फिर लाल नजर आया, जबकि यमुना में काफी दूर तक पानी का रंग काला दिखा। पानी में प्रदूषण के कारण एक पक्षी की भी मौत हो गई। मेलाधिकारी ने कमिश्नर को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में बताया कि है कि मरने वाली पक्षी साइबेरियन है। हालांकि पक्षी जब वन विभाग को सौंपा गया कि बताया गया कि कश्मीर से आया ‘गल्ल’ नाम की प्रजाति का पक्षी है, जो पहाड़ों पर बर्फबारी होने पर गंगा के मैदानी इलाकों की तरफ चला जाता है। मामला सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानी का नमूना ले लिया है।
मंगलवार सुबह करीब छह बजे संगम स्नान करने पहुंचे लोगों को गंगा से आ रहा पानी लाल और यमुना की ओर काला पानी दिखा। संगम का हाल देख काफी श्रद्धालु बिना स्नान किए लौट गए। सूचना पर समाजसेवी कमलेश सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी का हाल देख तो सुबह पौने आठ बजे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को सूचना दी। इसके बाद सवा आठ बजे कमिश्नर को बताया। साढ़े नौ बजे एडीएम सिटी मेला कार्यालय पहुंचे। वहां श्री सिंह के साथ मेला अधिकारी डॉ.रमेश कुमार, मत्स्य विकास अधिकारी हरीश सहाय को भी बुलाया गया।
मेलाधिकारी की ओर से कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक वहां एक साबेरियन पक्षी मरा हुआ मिला। उसे पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया। हालांकि बाद में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एसएन शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मरा हुआ पक्षी ‘गल्ल’ प्रजाति का है, जो कश्मीर से माइग्रेट होकर यहां आते हैं। उधर, मौके पर पहुंचने अफसरों को निरीक्षण के दौरान बालू का रंग मैरून दिखा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों ने पानी का नमूना लिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी फ्रैंकलीन का कहना है कि मंगलवार सुबह लिए गए पानी के नमूनों में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे उससे लाल और काला होने का पता चले। बताया कि सोमवार को भी पानी ठीक था। इसमें बीओडी की मात्रा तीन से चार मिलीग्राम प्रतिलीटर है जबकि डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा आठ मिलीग्राम प्रतिलीटर के आसपास है। यानी उनके हिसाब से पानी में प्रदूषण की मात्रा अधिक नहीं है।
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संगम पर मंगलवार सुबह साइबेरियन पक्षी के साथ कुछ मछलियों के भी मरने की खबर आई। समाजसेवी कमलेश सिंह का आरोप है कि उन्हें इस बारे में जब सूचना मिली तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। कुछ देर बाद श्री सिंह संगम नोज पर पहुंचे तो वहां मरीं मछलियां नहीं मिलीं। उन्होंने मछलियों को गायब कराने का आरोप लगाया। इस बीच कमिश्नर के निर्देश पर मेलाधिकारी डॉ.रमेश कुमार शुक्ल, मत्स्य विकास अधिकारी हरीश सहाय श्री सिंह के साथ संगम पहुंचे। निरीक्षण के साथ नाविकों और दुकानदारों से भी बात की गई। कमिश्नर और डीएम को भेजी रिपोर्ट में मेलाधिकारी ने बताया कि मौके पर मृत मछली नहीं मिलीं हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संगम पर बालू का रंग कत्थई दिखा।
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मंगलवार सुबह करीब छह बजे संगम स्नान करने पहुंचे लोगों को गंगा से आ रहा पानी लाल और यमुना की ओर काला पानी दिखा। संगम का हाल देख काफी श्रद्धालु बिना स्नान किए लौट गए। सूचना पर समाजसेवी कमलेश सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी का हाल देख तो सुबह पौने आठ बजे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को सूचना दी। इसके बाद सवा आठ बजे कमिश्नर को बताया। साढ़े नौ बजे एडीएम सिटी मेला कार्यालय पहुंचे। वहां श्री सिंह के साथ मेला अधिकारी डॉ.रमेश कुमार, मत्स्य विकास अधिकारी हरीश सहाय को भी बुलाया गया।
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मेलाधिकारी की ओर से कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक वहां एक साबेरियन पक्षी मरा हुआ मिला। उसे पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया। हालांकि बाद में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एसएन शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मरा हुआ पक्षी ‘गल्ल’ प्रजाति का है, जो कश्मीर से माइग्रेट होकर यहां आते हैं। उधर, मौके पर पहुंचने अफसरों को निरीक्षण के दौरान बालू का रंग मैरून दिखा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों ने पानी का नमूना लिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी फ्रैंकलीन का कहना है कि मंगलवार सुबह लिए गए पानी के नमूनों में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे उससे लाल और काला होने का पता चले। बताया कि सोमवार को भी पानी ठीक था। इसमें बीओडी की मात्रा तीन से चार मिलीग्राम प्रतिलीटर है जबकि डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा आठ मिलीग्राम प्रतिलीटर के आसपास है। यानी उनके हिसाब से पानी में प्रदूषण की मात्रा अधिक नहीं है।
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संगम पर मंगलवार सुबह साइबेरियन पक्षी के साथ कुछ मछलियों के भी मरने की खबर आई। समाजसेवी कमलेश सिंह का आरोप है कि उन्हें इस बारे में जब सूचना मिली तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। कुछ देर बाद श्री सिंह संगम नोज पर पहुंचे तो वहां मरीं मछलियां नहीं मिलीं। उन्होंने मछलियों को गायब कराने का आरोप लगाया। इस बीच कमिश्नर के निर्देश पर मेलाधिकारी डॉ.रमेश कुमार शुक्ल, मत्स्य विकास अधिकारी हरीश सहाय श्री सिंह के साथ संगम पहुंचे। निरीक्षण के साथ नाविकों और दुकानदारों से भी बात की गई। कमिश्नर और डीएम को भेजी रिपोर्ट में मेलाधिकारी ने बताया कि मौके पर मृत मछली नहीं मिलीं हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संगम पर बालू का रंग कत्थई दिखा।