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Prayagraj News: तूफानी पहलवान को चित कर अरविंद बने केशरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jan 2024 02:22 AM IST
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Arvind became Keshari by defeating Toofani wrestler
अखिल भारतीय विराट कुश्ती दंगल प्रतियोगिता में सहसों के अरविंद पहलवान ने सारे पहलवानों को चित कर जिला केशरी बनने की उपलब्धि हासिल की है। दंगल में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और वाराणसी के अखाड़ों में अभ्यास करने वाले प्रयागराज के पहलवानों ने प्रतिभाग किया।
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प्रतापपुर के कटरा बाजार में रविवार को हुए दंगल में दर्जन भर से अधिक पहलवानों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। अपनी कला और सूझबूझ का इस्तेमाल कर अरविंद पहलवान ने खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। फाइनल में फाफामऊ के तूफानी पहलवान को रोमांचक मुकाबले में पटखनी देकर खिताबी गदा पर अपना कब्जा जमा लिया।
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अरविंद तिवारी सहसों के सिंगरामऊ गांव के रहने वाले हैं। पिता सूर्यमणि तिवारी (नान्हू पहलवान) भी नामी पहलवान थे। घर पर ही बने अखाड़े में अरविंद ने पिता व भाई चंद्रकांत तिवारी के साथ वर्ष 2014 से कुश्ती का आगाज किया। वर्ष 2016 में जौनपुर में हुए राज्य स्तरीय दंगल में तीसरा स्थान हासिल कर राष्ट्रीय दंगल के लिए क्वालीफाइ किया। लेकिन वहां रैंक नहीं लग सकी। वर्ष 2017 में घुटने में चोट लगने से एक साल कुश्ती से दूर रहे। अब फिर से वापसी कर जिला केशरी बनने की उपलब्धि हासिल कर ली है। वह झूंसी रेलवे स्टेशन अखाड़े में मंडल केशरी मुकेश पहलवान से प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
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अधिकतर पहलवान मांस और अंडे खाकर अपने शरीर को मजबूत बनाते हैं। लेकिन अरविंद शाकाहारी हैं। उन्होंने बताया कि कि वह प्रतिदिन तीन लीटर दूध, दो किलो हरी सब्जी, बादाम पेस्ट, कच्चा पनीर, चना और देसी घी का सेवन करते हैं। इससे शरीर बहुत मजबूत रहता है।



अरविंद बताते हैं कि कुश्ती में उनकी रुचि को देखकर उनके पिता ने झूंसी रेलवे स्टेशन अखाड़े में दाखिला करा दिया। जो घर से 13 किलोमीटर दूर था। अखाड़े तक साइकिल से ही जाना होता था, ऐसे में वह सुबह 13 किलोमीटर अखाड़े साइकिल चलाकर जाते और वापस आ जाते। शाम में फिर वह साइकिल से ही अखाड़े तक पहुंचते और वापस आते। इस तरह वह रोजाना 52 किलोमीटर की साइकिल चलाया करते थे। पिछले साल बाइक ले ली। अब बाइक से ही अखाड़े आना-जाना होता है।
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