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स्वीकृत से अधिक ऊंची इमारत बनाने पर नहीं देना होगा स्टाम्प ड्यूटी

Tue, 05 Apr 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 05 Apr 2016 01:26 AM IST
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Approved stamp duty will not build more high-rise
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बहुमंजिला आवासीय अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदने वालों के लिए राहत वाली खबर। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की परचेजेबुल फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) पर स्टाम्प ड्यूटी लेने के शासनादेश पर सवाल खड़े करते हुए इसके तहत वसूली कार्रवाई पर रोक लगा दी है। शासन ने इस संबंध में 16 नवंबर 2015 को आदेश जारी किया था। इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी, जो परचेजेबुल एफएआर के नाम पर अपार्टमेंट में स्वीकृत से अधिक फ्लैटों का निर्माण कराते हैं और बाद में नियमित कराके ऊंची कीमतों पर बेचते हैं। ऐसा होने के बाद फ्लैटों की कीमतों में भी कमी होने की उम्मीद है। 
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गाजियाबाद के आनंद स्वरूप गर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एचजी रमेश और न्यायमूर्ति राघवेंद्र की खंडपीठ ने दिया। याची के अधिवक्ता वकील अनूप त्रिवेदी के मुताबिक विकास प्राधिकरण की धारा 14 में भवन का नक्शा पास करने का प्रावधान है। नक्शा पास करने के दौरान ही प्राधिकरण एफएआर तय करता है, जिसका अर्थ है कि उक्त भूखंड पर कितनी ऊंची इमारत का निर्माण होगा। इसमें यदि एकाध मंजिल बढ़ जाती है, तो विकास प्राधिकरण विकास के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेकर नक्शा स्वीकृत कर देता है। इसे परचेजेबुल एफएआर (क्रय योग्य तल क्षेत्र अनुपात) कहते हैं।
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प्रदेश सरकार ने 16 नवंबर 2015 को शासनादेश जारी कर कहा कि भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट 2008 के तहत प्राधिकरणों द्वारा परचेजेबुल एफएआर संबंधी जितने भी आदेश जारी किए गए हैं उन पर स्टाम्प ड्यूटी लगेगी। शासनादेश वर्ष 2007 से अब तक स्वीकृत परचेजेबुल एफएआर पर स्टाम्प ड्यूटी वसूल करने का आदेश दिया गया। ड्यूटी परचेजेबुल एफएआर मूल्य पर दस प्रतिशत वसूल की जानी थी। इससे फ्लैट की कीमतों में इजाफा होने लगा।  याचिका दाखिल कर शासनादेश और डीएम के नोटिस को चुनौती दी गई। कोर्ट ने इसे अनाधिकार पूर्ण आदेश मानते हुए इसके तहत वसूली कार्रवाई पर रोक लगा दी है तथा प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। 
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