{"_id":"5dd2b1f68ebc3e54f22ec0f1","slug":"appointment-will-be-automatically-void-on-fake-caste-certificate-allahabad-news-ald260501544","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर स्वतङ शून्य होगी नियुक्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर स्वतङ शून्य होगी नियुक्ति
विज्ञापन
Appointment will be automatically void on fake caste certificate
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि जाति प्रमाण पत्र यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा फर्जी घोषित कर दिया गया है तो इस आधार मिली नियुक्ति स्वयं शून्य हो जाएगी। इसके लिए विभागीय जांच की प्रक्रिया अपनाना जरूरी नहीं है। ऐसे कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस देकर बर्खास्त किया जाना कानून के विपरीत नहीं है। कोर्ट ने आईआईटी कानपुर द्वारा विभागीय अनुशासनिक जांच कार्रवाई कर याची को सेवा से बर्खास्त करने को नियमों के विपरीत नहीं माना है। इसी आधार पर याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने रमाकांत की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची आईआईटी कानपुर में बस कंडक्टर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के समय उसने अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र लगाया था। इसकी शिकायत होने पर मामले की जांच तहसीलदार से कराई गई। जांच के बाद याची को केवट जाति का पाया गया जो कि पिछडे़ वर्ग में आता है। याची के जाति प्रमाणपत्र को गलत बताते हुए रद्द कर दिया गया।
इस जांच के आधार पर विभागीय जांच कर आईआईटी कानपुर के निदेशक ने याची को बर्खास्त कर दिया। इस आदेश का अनुमोदन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन ने भी कर दिया। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई । कोर्ट ने कहा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जाति प्रमाण पत्र गलत पाया गया है और उसे रद्द कर दिया गया है, तो उसके आधार पर पाई गई नियुक्ति स्वत: शून्य हो जाएगी। ऐसे में आईआईटी कानपुर द्वारा की गई बर्खास्तगी विधि सम्मत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने रमाकांत की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची आईआईटी कानपुर में बस कंडक्टर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के समय उसने अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र लगाया था। इसकी शिकायत होने पर मामले की जांच तहसीलदार से कराई गई। जांच के बाद याची को केवट जाति का पाया गया जो कि पिछडे़ वर्ग में आता है। याची के जाति प्रमाणपत्र को गलत बताते हुए रद्द कर दिया गया।
विज्ञापन
इस जांच के आधार पर विभागीय जांच कर आईआईटी कानपुर के निदेशक ने याची को बर्खास्त कर दिया। इस आदेश का अनुमोदन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन ने भी कर दिया। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई । कोर्ट ने कहा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जाति प्रमाण पत्र गलत पाया गया है और उसे रद्द कर दिया गया है, तो उसके आधार पर पाई गई नियुक्ति स्वत: शून्य हो जाएगी। ऐसे में आईआईटी कानपुर द्वारा की गई बर्खास्तगी विधि सम्मत है।
विज्ञापन