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उच्चतर शिक्षा आयोग के पूर्व सचिव की नियुक्ति अवैध

Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
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Appointment of former Secretary of Higher Education Commission illegal
अदालत
हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व उपसचिव/सचिव संजय सिंह की नियुक्ति को अवैध ठहराया है। कोर्ट ने उनको तत्काल पद छोड़ने का निर्देश दिया है। संजय सिंह की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने रिट ऑफ को-वारंटो (अधिकार पृच्छा याचिका) जारी की है। संजय सिंह की छह अप्रैल 1998 को डिग्री कालेज में प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति की गई थी। उन्होंने नौकरी प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जनजाति नागा का फर्जी प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने कहा कि संजय सिंह आयोग के सचिव पद पर नियुक्ति पाने के योग्य नहीं हैं। सरकार ने एक ऐसे व्यक्ति को आयोग के सचिव का कार्यभार सौंपा जिसने फर्जी प्रमाणपत्र पर प्रवक्ता की नौकरी प्राप्त की है।
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ऐसे व्यक्ति को स्नातक और परास्नातक डिग्री कॉलेजों में प्रवक्ता, प्रोफेसर और प्राचार्य पदों पर नियुक्ति के लिए चयन करने हेतु रखा गया है। कोर्ट ने संजय सिंह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद जांच में उनकी अनदेखी करने पर तत्कालीन मुख्य सचिव की भी आलोचना की है। डा. धीरेंद्र सिंह और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने दिया है। याचिकाकर्ता गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता हैं। याचिका दाखिल कहा गया कि संजय सिंह ने नागा जाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी हासिल की। इसके अलावा उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से एमए की फर्जी डिग्री और अंकपत्र भी बनवाया है जिसका उपयोग नौकरी पाने के लिए किया गया। नागा जाति उत्तर प्रदेश में अधिसूचित नहीं है इसलिए उनको यहां इस जनजाति के आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता है।
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हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को जांच का आदेश दिया था। जांच के दौरान पता चला कि संजय सिंह से संबंधित मूल दस्तावेज पत्रावलियों से गायब हैं। मुख्य सचिव ने जांच में इन तथ्यों की अनदेखी की। कोर्ट के आदेश पर संजय सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें पुलिस ने यह कहते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी कि नियुक्ति से संबंधित कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। कोई आपराधिक कार्य नहीं पाया गया। मुख्य सचिव ने भी जांच अधिकारी की ढुलमुल रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने इस पूरी कार्यवाही पर नाराजगी व्यक्त की है।
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रिट ऑफ को-वारंटो या अधिकार पृच्छा याचिका ऐसे मामलों में जारी की जाती है जहां किसी संवैधानिक महत्व के पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद पैदा हो गया हो। हाईकोर्ट ने गत वर्ष लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के डा. सलिल कुमार, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के चेयरमैन लाल बिहारी पांडेय आदि को पद से हटाने का आदेश दिया था।
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