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साइबर शातिरों का कहर, फ्राड से परेशान शहर
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Allahabad cyber crime
- फोटो : AU
साइबर शातिरों का कहर, फ्राड से परेशान शहर
साइबर शातिरों के कहर से शहर परेशान है। आनलाइन फ्राड करके पांच लोगों के खाते से सवा दो लाख रुपये उड़ा दिए गए। कुछ मामले आनलाइन फ्राड के हैं तो कुछ शातिरों ने बैंक अफसर बनकर लोगों को ठग लिया। सभी मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर क्राइम ब्रांच के साइबर सेल को जांच सौंपी गई है। पुलिस अफसरों का कहना है कि बार बार लोगों को चेताया जाता है कि वे ओटीपी किसी को भी न बताएं लेकिन इसके बाद भी लोग फोन करने वाले शातिरों के जाल में फंस जा रहे हैं।
केस नंबर एक : वैस खान करेली के जेके आशियाना में रहते हैं। वैस के मोबाइल पर शातिर ने बैंक अफसर बनकर फोन किया गया। इसके बाद उनके खाते से 84 हजार रुपये गायब हो गए। उनका खाता एक्सिस बैंक में था। उनके खाते से जब रुपये कटने का मैसेज आया तो उन्होंने बैंक में शिकायत की। वहां से उन्हें पुलिस के पास भेजा गया। दो जुलाई को रिपोर्ट दर्ज की गई। इंस्पेक्टर करेली विनीत सिंह ने बताया कि जिस नंबर से काल आई थी, उसे ट्रेस किया जा रहा है।
केस नंबर दो : टैगोर टाउन के रहने वाले धनंजय सिंह ने गूगल पे पर एकाउंट बनाया था। धनंजय ने आनलाइन कहीं पर पेमेंट किया। वहां नहीं हुआ तो उन्होंने कस्टमर केयर पर बात की। इसके बाद उनके मोबाइल पर एक नंबर से फोन कर आया। शातिर ने कुछ डीटेल्स पूछी और उनके खाते से 24 हजार 500 रुपये कट गए। उन्होंने दो जुलाई को जार्जटाउन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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केस नंबर तीन : नेहरू रोड कर्नलगंज के रहने वाले विमल कुमार श्रीवास्तव के मोबाइल आनलाइन फ्राड ने बैंक अफसर बनकर फोन किया। उसने जो पूछा विमल बताते गए। अंत में उन्होंने ओटीपी भी फ्राड को बता दिया। इसके कुछ देर बाद उनके खाते से 40 हजार रुपये कट गए। उन्होंने तुरंत बैंक में संपर्क किया लेकिन वहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। दो जुलाई को जार्जटाउन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
केस नंबर चार : लखनऊ की रहने वालीं कविता तिवारी इन दिनों मेंहदौरी कालोनी में रहकर काम करती हैं। कुछ दिन पहले उनके नंबर पर भी साइबर शातिर ने फोन किया। कविता ने उसे बैंक अफसर समझकर खाते की जानकारी दे दी और उनके खाते से 15 हजार रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने दो जुलाई को शिवकुटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
केस नंबर पांच : बम्हरौली के रहने वाले मूल सिंह के मोबाइल पर कुछ दिन पहले फोन गया। फ्राड ने खुद को एसबीआई का अफसर बताया और कहा कि उनका एटीएम कार्ड बंद होने वाला है। तुरंत अगर कार्ड नंबर और ओटीपी न बताया तो एकाउंट बंद हो जाएगा। मूल सिंह का कहना था कि उसे मालूम था कि ओटीपी नहीं बताना चाहिए लेकिन उस समय वह घबरा गए थे और ओटीपी भी बता दिया। कुछ ही देर में उनके खाते से 49 हजार 490 रुपये कट गए। दो जुलाई को मूल सिंह की भी रिपोर्ट दर्ज की गई।
आनलाइन शातिरों से बचने का एकमात्र उपाय है कि फोन पर किसी को भी खाते और एटीएम काड से संबंधित जानकारी न दी जाय। खासकर ओटीपी किसी को भी न बताया जाय। लोगों को जागरूक करने के लिए बैंक भी अक्सर एसएमएस भेजकर सावधान करती है कि बैंक अफसर कभी भी ओटीपी या खाते की जानकारी फोन पर नहीं पूछते। इसके बाद भी आनलाइन ठगी की घटनाएं बढ़ती जा रही है। अक्सर फोन झारखंड या दक्षिण के राज्य के होते हैं। ठगी के बाद फोन नंबर बंद कर दिए जाते हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे फोन पर खाते या एटीएम की जानकारी किसी को न दें। दूसरी बात यह कि ठगों का फोन आने के बाद वे किसी भी नंबर को न दबाएं। अगर कोई बैंक अफसर बनकर फोन कर रहा है तो समझ लीजिए कि वह फ्राड है। उस नंबर की सूचना तुरंत साइबर सेल को दे दी जाय।
आशुतोष मिश्रा, एसपी क्राइम
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साइबर शातिरों के कहर से शहर परेशान है। आनलाइन फ्राड करके पांच लोगों के खाते से सवा दो लाख रुपये उड़ा दिए गए। कुछ मामले आनलाइन फ्राड के हैं तो कुछ शातिरों ने बैंक अफसर बनकर लोगों को ठग लिया। सभी मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर क्राइम ब्रांच के साइबर सेल को जांच सौंपी गई है। पुलिस अफसरों का कहना है कि बार बार लोगों को चेताया जाता है कि वे ओटीपी किसी को भी न बताएं लेकिन इसके बाद भी लोग फोन करने वाले शातिरों के जाल में फंस जा रहे हैं।
केस नंबर एक : वैस खान करेली के जेके आशियाना में रहते हैं। वैस के मोबाइल पर शातिर ने बैंक अफसर बनकर फोन किया गया। इसके बाद उनके खाते से 84 हजार रुपये गायब हो गए। उनका खाता एक्सिस बैंक में था। उनके खाते से जब रुपये कटने का मैसेज आया तो उन्होंने बैंक में शिकायत की। वहां से उन्हें पुलिस के पास भेजा गया। दो जुलाई को रिपोर्ट दर्ज की गई। इंस्पेक्टर करेली विनीत सिंह ने बताया कि जिस नंबर से काल आई थी, उसे ट्रेस किया जा रहा है।
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केस नंबर दो : टैगोर टाउन के रहने वाले धनंजय सिंह ने गूगल पे पर एकाउंट बनाया था। धनंजय ने आनलाइन कहीं पर पेमेंट किया। वहां नहीं हुआ तो उन्होंने कस्टमर केयर पर बात की। इसके बाद उनके मोबाइल पर एक नंबर से फोन कर आया। शातिर ने कुछ डीटेल्स पूछी और उनके खाते से 24 हजार 500 रुपये कट गए। उन्होंने दो जुलाई को जार्जटाउन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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केस नंबर तीन : नेहरू रोड कर्नलगंज के रहने वाले विमल कुमार श्रीवास्तव के मोबाइल आनलाइन फ्राड ने बैंक अफसर बनकर फोन किया। उसने जो पूछा विमल बताते गए। अंत में उन्होंने ओटीपी भी फ्राड को बता दिया। इसके कुछ देर बाद उनके खाते से 40 हजार रुपये कट गए। उन्होंने तुरंत बैंक में संपर्क किया लेकिन वहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। दो जुलाई को जार्जटाउन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
केस नंबर चार : लखनऊ की रहने वालीं कविता तिवारी इन दिनों मेंहदौरी कालोनी में रहकर काम करती हैं। कुछ दिन पहले उनके नंबर पर भी साइबर शातिर ने फोन किया। कविता ने उसे बैंक अफसर समझकर खाते की जानकारी दे दी और उनके खाते से 15 हजार रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने दो जुलाई को शिवकुटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
केस नंबर पांच : बम्हरौली के रहने वाले मूल सिंह के मोबाइल पर कुछ दिन पहले फोन गया। फ्राड ने खुद को एसबीआई का अफसर बताया और कहा कि उनका एटीएम कार्ड बंद होने वाला है। तुरंत अगर कार्ड नंबर और ओटीपी न बताया तो एकाउंट बंद हो जाएगा। मूल सिंह का कहना था कि उसे मालूम था कि ओटीपी नहीं बताना चाहिए लेकिन उस समय वह घबरा गए थे और ओटीपी भी बता दिया। कुछ ही देर में उनके खाते से 49 हजार 490 रुपये कट गए। दो जुलाई को मूल सिंह की भी रिपोर्ट दर्ज की गई।
आनलाइन शातिरों से बचने का एकमात्र उपाय है कि फोन पर किसी को भी खाते और एटीएम काड से संबंधित जानकारी न दी जाय। खासकर ओटीपी किसी को भी न बताया जाय। लोगों को जागरूक करने के लिए बैंक भी अक्सर एसएमएस भेजकर सावधान करती है कि बैंक अफसर कभी भी ओटीपी या खाते की जानकारी फोन पर नहीं पूछते। इसके बाद भी आनलाइन ठगी की घटनाएं बढ़ती जा रही है। अक्सर फोन झारखंड या दक्षिण के राज्य के होते हैं। ठगी के बाद फोन नंबर बंद कर दिए जाते हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे फोन पर खाते या एटीएम की जानकारी किसी को न दें। दूसरी बात यह कि ठगों का फोन आने के बाद वे किसी भी नंबर को न दबाएं। अगर कोई बैंक अफसर बनकर फोन कर रहा है तो समझ लीजिए कि वह फ्राड है। उस नंबर की सूचना तुरंत साइबर सेल को दे दी जाय।
आशुतोष मिश्रा, एसपी क्राइम