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वेब सीरीज तांडव मामले में अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
Thu, 25 Feb 2021 08:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 25 Feb 2021 08:58 PM IST
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तांडव फिल्म का पोस्टर
- फोटो : Facebook
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेजन प्राइम पर विवादित वेब सीरीज तांडव के प्रसारण मामले में अमेजन प्राइम की भारत प्रमुख अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर्णा व सीरीज के प्रसारण तथा निर्माण से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ देश भर में दस मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुसंख्यक लोगों के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों हनन नहीं कर सकती।
अग्रिम जमानत के लिए विवेचना में सहयोग करना पहली शर्त है। याची लखनऊ हजरतगंज में दर्ज प्राथमिकी में कोर्ट से राहत मिलने के बाद विवेचना में सहयोग नहीं कर रही। उसके आचरण से साफ है कि वह कानून का सम्मान करना नहीं जानती। जो बहुसंख्यक समुदाय के मूल अधिकारों का सम्मान नहीं करते उन्हें अपने मूल अधिकारों के सुरक्षा की मांग करने का हक नहीं है। कोर्ट ने तांडव नाम को ही भावना को ठेस पहुंचाने वाला मानते हुए अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया की पढी, 15 साल फिल्म जगत से जुड़ी और पत्रकारिता कोर्स कर चुकी याची ने जेएनयू दिल्ली के छात्रों के आपत्तिजनक नारों को भी वेब सीरीज में शामिल किया है, जो भारतीयों को असहिष्णु बताता है।
इसमें भारत की रहने लायक देश न होने की छवि पेश करने की कोशिश की गई है। इस सीरीज को लेकर देश में 10 एफआईआर व चार आपराधिक केस दर्ज हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रसारित सीरीज के डायरेक्टर सह अभियुक्त अली अब्बास हैं। याची के खिलाफ गौतमबुद्धनगर, ग्रेटर नोएडा के राबूपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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अग्रिम जमानत के लिए विवेचना में सहयोग करना पहली शर्त है। याची लखनऊ हजरतगंज में दर्ज प्राथमिकी में कोर्ट से राहत मिलने के बाद विवेचना में सहयोग नहीं कर रही। उसके आचरण से साफ है कि वह कानून का सम्मान करना नहीं जानती। जो बहुसंख्यक समुदाय के मूल अधिकारों का सम्मान नहीं करते उन्हें अपने मूल अधिकारों के सुरक्षा की मांग करने का हक नहीं है। कोर्ट ने तांडव नाम को ही भावना को ठेस पहुंचाने वाला मानते हुए अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया है।
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दूसरों की भावनाओं का सम्मान करें
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर कहा है कि दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। कोर्ट ने पश्चिमी देशों के फिल्म निर्माताओं का हवाला देकर कहा कि वे जीसस व मोहम्मद पर फिल्म नहीं बनाते किंतु हिंदी फिल्में हिंदू देवी देवताओं को लेकर बनाई जाती हैं।
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कोर्ट ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया की पढी, 15 साल फिल्म जगत से जुड़ी और पत्रकारिता कोर्स कर चुकी याची ने जेएनयू दिल्ली के छात्रों के आपत्तिजनक नारों को भी वेब सीरीज में शामिल किया है, जो भारतीयों को असहिष्णु बताता है।
इसमें भारत की रहने लायक देश न होने की छवि पेश करने की कोशिश की गई है। इस सीरीज को लेकर देश में 10 एफआईआर व चार आपराधिक केस दर्ज हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रसारित सीरीज के डायरेक्टर सह अभियुक्त अली अब्बास हैं। याची के खिलाफ गौतमबुद्धनगर, ग्रेटर नोएडा के राबूपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।