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अतीक गैंग में खलबली, गुर्गे हुए भूमिगत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 13 Jun 2017 02:15 AM IST
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अतीक अहमद (फाइल फोटो)
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शुआट्स की घटना के बाद अतीक अहमद और उनके गिरोह के लोगों के मुसीबत के दिन शुरू हुए और मुश्किल दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। बदले दौर में अतीक जेल गए तो उनके करीबियों में खलबली मची। कर्नलगंज थाने में दर्ज हुए गवाह को धमकाने और अपहरण की कोशिश के मुकदमे के बाद तो गिरोह के ज्यादातर सदस्य भूमिगत हो गए हैं। उनके कई करीबियों पर गुंडा एक्ट लगाने के बाद पुलिस ने छापेमारी की लेकिन पता चला कि वे घर छोड़कर भागे हुए हैं।
शहर पश्चिमी से पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर के सांसद रहे अतीक अहमद पुलिस रेकार्ड में खुल्दाबाद थाने के हिस्ट्रीशीटर तथा अंतरराज्यीय गिरोह आईएस-227 के सरगना हैं। उनके गिरोह में 138 सदस्य सूचीबद्ध हैं जिनमें छोटे भाई पूर्व विधायक अशरफ भी शामिल हैं। सपा शासन में विधायक या सांसद नहीं होने के बावजूद बाहुबली अतीक की हनक बनी रही। उसी हनक के बूते उन्होंने कई विवादास्पद कारनामे किए। कसारी-मसारी में कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जा करार देते हुए उन्होंने खुद खड़े होकर जेसीबी से कई मकान ढहवा दिए। हल्ला मचा तो पुलिस-प्रशासन की जांच बैठी लेकिन अपनी सरकार थी इसलिए हुआ कुछ नहीं। सपा शासन यानी अपना शासन था इसीलिए उन्होंने शुआट्स में घुसकर गुंडागर्दी कर डाली। पुलिस ने घटना में केस तो लिखा लेकिन उन पर हाथ नहीं डाला। सिर्फ नोटिस दिया। मगर हाईकोर्ट की सख्ती से स्थिति बदली और अतीक जेल भेज दिए गए। अब शासन भी बदल गया तो और भी कड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अतीक समेत उनके गिरोह के दूसरे माफियाओं के खिलाफ पुलिस-प्रशासन अवैध कब्जे मुक्त कराने और गुंडा एक्ट तथा जिला बदर की कार्यवाही कर रही है।
इसी बीच एसएसपी के आदेश पर 16 महीने पुरानी कचहरी की घटना में राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में रविवार को अतीक, अशरफ समेत 24 लोगों को नामजद और इतने ही अज्ञात पर संगीन धाराओं में केस लिखा गया तो गिरोह के सदस्यों में अफरातफरी मच गई। दिन भर करेली, खुल्दाबाद, बमरौली, कसारी-मसारी इलाके में फॉरच्यूनर में घूमकर रौब जमाने वाले गिरोह के लोग और ज्यादातर करीबी अब दिख नहीं रहे हैं। गिरफ्तारी के डर से कुछ लोग जिला छोड़कर मुंबई-दिल्ली समेत दूसरे शहर चले गए हैं। सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा का कहना है कि मुकदमे में सुबूत जुटाए जा रहे हैं। धमकी और अपहरण की कोशिश के आरोप सही साबित हुए तो नामजद समेत बाकी अज्ञात लोगों को भी चिन्हित कर पकड़ा जाएगा। इस बीच जानकारी मिली है कि कचहरी में उस घटना की वीडियो फुटेज भी मौजूद है। हालांकि सीओ का कहना है कि अभी उन्हें फुटेज नहीं मिला है। फुटेज मिला तो उससे भी बाकी लोग चिन्हित होंगे।
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अतीक की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब नए मुकदमे दर्ज होने पर घबराए गुर्गे और करीबी फॉरच्यूनर से घूमने में घबराने लगे हैं। बमरौली, कसारी मसारी, करेली में अतीक के कई आदमी औने-पौने दाम पर फॉरच्यूनर बेचने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि पुलिस गाड़ी सीज कर सकती है।
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शहर पश्चिमी से पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर के सांसद रहे अतीक अहमद पुलिस रेकार्ड में खुल्दाबाद थाने के हिस्ट्रीशीटर तथा अंतरराज्यीय गिरोह आईएस-227 के सरगना हैं। उनके गिरोह में 138 सदस्य सूचीबद्ध हैं जिनमें छोटे भाई पूर्व विधायक अशरफ भी शामिल हैं। सपा शासन में विधायक या सांसद नहीं होने के बावजूद बाहुबली अतीक की हनक बनी रही। उसी हनक के बूते उन्होंने कई विवादास्पद कारनामे किए। कसारी-मसारी में कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जा करार देते हुए उन्होंने खुद खड़े होकर जेसीबी से कई मकान ढहवा दिए। हल्ला मचा तो पुलिस-प्रशासन की जांच बैठी लेकिन अपनी सरकार थी इसलिए हुआ कुछ नहीं। सपा शासन यानी अपना शासन था इसीलिए उन्होंने शुआट्स में घुसकर गुंडागर्दी कर डाली। पुलिस ने घटना में केस तो लिखा लेकिन उन पर हाथ नहीं डाला। सिर्फ नोटिस दिया। मगर हाईकोर्ट की सख्ती से स्थिति बदली और अतीक जेल भेज दिए गए। अब शासन भी बदल गया तो और भी कड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अतीक समेत उनके गिरोह के दूसरे माफियाओं के खिलाफ पुलिस-प्रशासन अवैध कब्जे मुक्त कराने और गुंडा एक्ट तथा जिला बदर की कार्यवाही कर रही है।
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इसी बीच एसएसपी के आदेश पर 16 महीने पुरानी कचहरी की घटना में राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में रविवार को अतीक, अशरफ समेत 24 लोगों को नामजद और इतने ही अज्ञात पर संगीन धाराओं में केस लिखा गया तो गिरोह के सदस्यों में अफरातफरी मच गई। दिन भर करेली, खुल्दाबाद, बमरौली, कसारी-मसारी इलाके में फॉरच्यूनर में घूमकर रौब जमाने वाले गिरोह के लोग और ज्यादातर करीबी अब दिख नहीं रहे हैं। गिरफ्तारी के डर से कुछ लोग जिला छोड़कर मुंबई-दिल्ली समेत दूसरे शहर चले गए हैं। सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा का कहना है कि मुकदमे में सुबूत जुटाए जा रहे हैं। धमकी और अपहरण की कोशिश के आरोप सही साबित हुए तो नामजद समेत बाकी अज्ञात लोगों को भी चिन्हित कर पकड़ा जाएगा। इस बीच जानकारी मिली है कि कचहरी में उस घटना की वीडियो फुटेज भी मौजूद है। हालांकि सीओ का कहना है कि अभी उन्हें फुटेज नहीं मिला है। फुटेज मिला तो उससे भी बाकी लोग चिन्हित होंगे।
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अतीक की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब नए मुकदमे दर्ज होने पर घबराए गुर्गे और करीबी फॉरच्यूनर से घूमने में घबराने लगे हैं। बमरौली, कसारी मसारी, करेली में अतीक के कई आदमी औने-पौने दाम पर फॉरच्यूनर बेचने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि पुलिस गाड़ी सीज कर सकती है।