प्रेरक : अंशिका ने अंगदान कर पेश की भाई-बहन के अटूट रिश्ते की नजीर, राष्ट्रीय फुटबॉलर ने दांव पर लगाया कैरियर
दोनों भाई-बहन को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में बीती 21 जून को भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 22 जून को डॉ.वलीउल्लाह सिद्दीकी की देखरेख में सफल सर्जरी की गई। पूरे कॅरियर को दांव पर लगाकर अंशिका की ओर से किया गया यह योगदान हर किसी को प्रेरित करने वाला है।
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भाई की ओर से बहन की रक्षा का वचन दिए जाने से इतर एक बहन ने रक्षाबंधन से पहले अपने भाई को जीवनदान देकर नजीर पेश की है। स्टेनली रोड की राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी अंशिका कैथवास (28) ने अपने भाई को अपना लिवर दान कर उसकी जान बचाने का काम किया है।
अंशिका के 30 वर्षीय भाई शैलेंद्र कुमार कैथवास (कराटे कोच) को एक वर्ष से पेट में परेशानी थी। जांच के बाद पता चला कि उसे गंभीर किस्म की क्रिप्टोजेनिक सिरोसिस बीमारी है, जिसके इलाज के लिए एकमात्र विकल्प, लिवर ट्रांसप्लांट है। चार भाई-बहन में सबसे छोटी अंशिका का रक्तवर्ग, भाई से मेल खाता है, सो उसने डॉक्टरों से बात की और पूरे कॅरियर को दांव पर लगाकर लिवर ट्रांसप्लांट कराकर भाई की जिंदगी बचा ली।
दोनों भाई-बहन को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में बीती 21 जून को भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 22 जून को डॉ.वलीउल्लाह सिद्दीकी की देखरेख में सफल सर्जरी की गई। पूरे कॅरियर को दांव पर लगाकर अंशिका की ओर से किया गया यह योगदान हर किसी को प्रेरित करने वाला है।
अंशिका राष्ट्रीय स्तर की बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी है। प्रयागराज के ही सदर बाजार से उन्होंने फुटबॉल का ककहरा सीखा है। उन्होंने महाराष्ट्र, कानपुर और यूपी टीम से कई बार फुटबॉल मैच खेलते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। अंशिका के पिता कमलेश चंद्र टॉफी-बिस्किट की एक छोटी सी गुमटी चलाते हैं,जबकि मां लीलावती गृहणी हैं।
पिता कमलेश ने इसी गुमटी से छह लोगों का पालन-पोषण किया है।
प्रयाग महिला विद्यापीठ से इंटर की पढ़ाई करने वाली अंशिका ने वर्ष 2012 में इसी स्कूल से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद वह कानपुर विश्वविद्यालय की ओर से खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में शामिल हुई। वर्ष 2018 में उसने संतोष ट्रॉफी भी खेली। तमाम अभावों के बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुनी गई लेकिन पासपोर्ट में नाम की गलती से वह प्रतियोगिता में शामिल होने फ्रांस नहीं जा पाई।
ऑपरेशन के समय चार महीने की थी बच्ची
अंशिका की शादी दो वर्ष पहले पंजाब के मोगा शहर के इंद्रगढ़ गांव में मेडिकल स्टोर पर नौकरी करने वाले तारसेम लाल से हुई है। उनकी एक छह महीने की बेटी भी है। लिवर ट्रांसप्लांट के समय वह पांच महीने की थी। अंशिका ने बताया, लिवर ट्रांसप्लांट के लिए कुल 25 लाख रुपये की जरूरत थी। प्रधानमंत्री कोष से पांच लाख रुपये ही मिले जबकि 20 लाख रुपये उनके बहनोई ने ऋण ले रखा है।
दस दिन बाद से शुरू करेंगी वार्मअप
अंशिका फिलहाल दस दिनों के बाद मैदान पर उतरकर ठीक तरह से वार्मअप शुरू करेंगी, अभी वह अपनी बहन के घर पर वाराणसी में हैं। डॉक्टर ने उन्हें सलाह दी थी कि तीन माह के बाद हल्का-फुल्का वार्मअप कर सकती हैं। वार्मअप की शुरुआत के बाद वापस ठीक तरीके से फुटबॉल खेलने में एक वर्ष तक का इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि फुटबॉल एक उच्च गति वाला खेल है। अंशिका ने कहा, फुटबॉल उनका जुनून है। इसी में वह अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं।