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बिना आंसर-की परिणाम घोषित
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sun, 03 May 2015 02:22 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा के रिजल्ट पर भी सवाल खड़ा हो गया है। आंसर-की जारी किए तथा आपत्ति मांगे बिना ही परिणाम घोषित कर दिया गया है। आयोग की ओर से लंबे अंतराल के बाद बिना आंसर-की जारी किए रिजल्ट घोषित किया गया है। पूर्व की कई भर्तियों में आयोग ने 20 से 25 प्रश्नों के गलत जवाब को सही मान लिया था। इसे लेकर आयोग के अफसरों की हमेशा फजीहत भी होती रही है। ऐसे में बिना आंसर-की जारी किए रिजल्ट घोषित करने पर अभ्यर्थियाें ने धांधली की आशंका जताई है।
आयोग में व्यवस्था रही है कि वस्तुनिष्ठ आधारित भर्ती परीक्षाओं में रिजल्ट घोषित करने से पहले आंसर-की जारी की जाती है। उस पर अभ्यर्थियों से आपत्ति मांगी जाती है। फिर उनका निस्तारण कर रिजल्ट घोषित किया जाता है। बीच में आयोग की बैठक में संशोधित आंसर-की जारी करने का भी निर्णय लिया गया था, लेकिन इस पर अमल तो दूर आयोग ने राजस्व निरीक्षक भर्ती की आंसर-की ही जारी नहीं की। डॉ. अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद आयोग की भर्तियां लगातार विवादित रही हैं।
आरओ-एआरओ-2013 भर्ती परीक्षा में भी कई प्रश्नों के जवाब पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। अभी यह मामला हाईकोर्ट में है। ऐसे ही एक मामले में न्यायालय ने अफसरों को फटकार लगाई थी तथा अध्यक्ष को भी बुलाया था। इसके अलावा पीसीएस-जे समेत कई रिजल्ट संशोधित भी करने पड़े। इसके बावजूद बिना आंसर-की जारी किए रिजल्ट घोषित करने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग सूत्र का कहना है कि चौतरफा विवाद में फंसे अफसर एक के बाद एक विवादित फैसले ले रहे हैं। यह कदम भी उसी का हिस्सा है।
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बिना आंसर-की जारी किए राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने पर अभ्यर्थियों ने घोर आपत्ति जताई है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की शनिवार को हुई बैठक में अभ्यर्थियों का साफ कहना था कि यह सब धांधली छिपाने के लिए किया गया है। संदीप यादव, जटाशंकर मौर्य, शालिग्राम बिंद, धर्मेंद्र उपाध्याय, सतीश, रवि सिंह आदि का यह भी कहना था कि उनका पेपर काफी अच्छा हुआ था, लेकिन सही मूल्यांकन नहीं होने से वे बाहर हो गए। अवनीश पांडेय का कहना था कि आयोग के जवाब पर लगातार आपत्तियां उठती रही हैं। ऐसे में आंसर-की जारी नहीं होने से आशंकाआें को और बल मिलता है।
अयोध्या सिंह का कहना था कि अंतिम परिणाम में सफल अभ्यर्थियों का नाम नहीं लिखे जाने का फैसला भी आयोग अफसरों की मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने पूरा मामला राज्यपाल के समक्ष रखे जाने की घोषणा की। उन्होंने इन मुद्दों पर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने की भी घोषणा की। अभ्यर्थियों ने इस मुद्दे पर कोर्ट जाने की भी बात कही। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की बैठक में भी आयोग की भर्तियों में धांधली का आरोप लगाया गया। प्रतियोगियों ने इसके खिलाफ आंदोलन की घोषणा की। बैठक में कौशल सिंह, अनिल उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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आयोग में व्यवस्था रही है कि वस्तुनिष्ठ आधारित भर्ती परीक्षाओं में रिजल्ट घोषित करने से पहले आंसर-की जारी की जाती है। उस पर अभ्यर्थियों से आपत्ति मांगी जाती है। फिर उनका निस्तारण कर रिजल्ट घोषित किया जाता है। बीच में आयोग की बैठक में संशोधित आंसर-की जारी करने का भी निर्णय लिया गया था, लेकिन इस पर अमल तो दूर आयोग ने राजस्व निरीक्षक भर्ती की आंसर-की ही जारी नहीं की। डॉ. अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद आयोग की भर्तियां लगातार विवादित रही हैं।
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आरओ-एआरओ-2013 भर्ती परीक्षा में भी कई प्रश्नों के जवाब पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। अभी यह मामला हाईकोर्ट में है। ऐसे ही एक मामले में न्यायालय ने अफसरों को फटकार लगाई थी तथा अध्यक्ष को भी बुलाया था। इसके अलावा पीसीएस-जे समेत कई रिजल्ट संशोधित भी करने पड़े। इसके बावजूद बिना आंसर-की जारी किए रिजल्ट घोषित करने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग सूत्र का कहना है कि चौतरफा विवाद में फंसे अफसर एक के बाद एक विवादित फैसले ले रहे हैं। यह कदम भी उसी का हिस्सा है।
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बिना आंसर-की जारी किए राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने पर अभ्यर्थियों ने घोर आपत्ति जताई है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की शनिवार को हुई बैठक में अभ्यर्थियों का साफ कहना था कि यह सब धांधली छिपाने के लिए किया गया है। संदीप यादव, जटाशंकर मौर्य, शालिग्राम बिंद, धर्मेंद्र उपाध्याय, सतीश, रवि सिंह आदि का यह भी कहना था कि उनका पेपर काफी अच्छा हुआ था, लेकिन सही मूल्यांकन नहीं होने से वे बाहर हो गए। अवनीश पांडेय का कहना था कि आयोग के जवाब पर लगातार आपत्तियां उठती रही हैं। ऐसे में आंसर-की जारी नहीं होने से आशंकाआें को और बल मिलता है।
अयोध्या सिंह का कहना था कि अंतिम परिणाम में सफल अभ्यर्थियों का नाम नहीं लिखे जाने का फैसला भी आयोग अफसरों की मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने पूरा मामला राज्यपाल के समक्ष रखे जाने की घोषणा की। उन्होंने इन मुद्दों पर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने की भी घोषणा की। अभ्यर्थियों ने इस मुद्दे पर कोर्ट जाने की भी बात कही। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की बैठक में भी आयोग की भर्तियों में धांधली का आरोप लगाया गया। प्रतियोगियों ने इसके खिलाफ आंदोलन की घोषणा की। बैठक में कौशल सिंह, अनिल उपाध्याय आदि मौजूद रहे।