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एटीएम क्लोन कर रुपये उड़ाने वाला गिरोह पकड़ा गया

Tue, 17 Dec 2019 01:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 01:27 AM IST
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An ATM card was cloned and a gang of money was caught
प्रयागराज। एसटीएफ ने एटीएम कार्ड क्लोन करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए प्रतापगढ़ के तीन जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से कार्ड स्कैन करने के स्किमर समेत तमाम उपकरण बरामद हुए हैं, जिससे क्लोन किया जाता था। उनके पास से तीन लाख 69 हजार रुपये भी मिले हैं। पूछताछ में पता चला है कि उन्होंने 50 लाख रुपयों से अधिक की जालसाजी की है।
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एसटीएफ ने सोमवार को करेली के पहलवान तिराहे के पास से प्रतापगढ़ के जेठवारा निवासी नेमचंद्र सरोज, कपिल वर्मा और अंतू के संजय सरोज को गिरफ्तार कर लिया। तीनों कल्लू डान गिरोह के सदस्य हैं। गिरोह एटीएम कार्ड क्लोन कर लोगों के रुपये उड़ाने का काम करता है। उनके पास से एक मैग्नेटिक एटीएम कार्ड रीडर (स्किमर), कार्ड स्कैनर, लैपटाप, अलग अलग बैंकों के 14 एटीएम कार्ड, एटीएम डिस्पेंसर को फंसाने वाला उपकरण आदि चीजें बरामद हुई हैं। तीन लाख 69 हजार और इटियोस कार भी उनके पास मिली है। एसटीएफ इंस्पेक्टर अतुल सिंह और केसी ने बताया कि प्रतापगढ़ शहर का रहने वाला राजेंद्र सिंह उर्फ कल्लू डान बिहार से क्लोनिंग का तरीका सीखकर आया और गिरोह के लोगों को भी सिखाया। बिना गार्ड वाले एटीएम बूथों में भीड़ के समय घुसकर गिरोह के एटीएम को स्किमर से स्कैन कर लेते थे। फिर पिन देखकर उनका क्लोन तैयार करते थे। अब तक 50 लाख से अधिक का फ्राड गिरोह के लोग कर चुके हैं। मुख्य आरोपी कल्लू डान को इस मामले में वांछित किया गया है। उसकी तलाश की जा रही है।
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लैपटॉप में क्लोन बनाने वाला साफ्टवेयर मिला
प्रयागराज। जालसाजों के साफ्टवेयर से एसटीएफ को तमाम जानकारी मिली है। स्कैनर, कार्ड रीडल और साफ्टवेयर युक्त लैपटॉप एक आनलाइन कंपनी में उपलब्ध है। वहीं से लैपटाप मंगाया गया था। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि कार्ड स्कैन करने के बाद स्किमर को लैपटॉप से जोड़ डाटा ट्रांसफर कर लिया जाता है। लैपटॉप में मौजूद साफ्टवेयर से क्लोन तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद वे किसी भी एटीएम बूथ से पैसा निकाल लेते थे। इसके अलावा वे एटीएम कैश डिस्पेंसर को बाधित भी करते थे। हाथ से ही एक उपकरण बनाया था। इसमें कोई पैसा निकालने जाता है तो पैसा मशीन में फंस जाता है। रुपये फंसने के बाद लोग जब वहां से चले जाते थे, तो हाथ से बने उपकरण से डिस्पेंसर खींचकर गिरोह के रुपये निकाल लेते थे।
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