प्रयागराज : स्वामी संग सपा में गए अमरनाथ मौर्य की कुर्सी खतरे में, कोआपरेटिव बैंक के चुने गए थे अध्यक्ष
चार वर्ष पहले अमरनाथ मौर्य लगातार दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। पिछले दिनों समिति के एक सदस्य ने अमरनाथ के निर्वाचन को चुनौती दी थी। सदस्य ने अमरनाथ के निर्वाचन को नियम विरुद्ध बताया है।
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स्वामी प्रसाद मौर्य संग सपा का दामन थामने वाले सहकारी बैंक प्रबंध समिति के अध्यक्ष अमरनाथ मौर्य की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। उनके निर्वाचन पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रबंध समिति बोर्ड की आठ अप्रैल को होने वाली बैठक में इस पर निर्णय होगा।
चार वर्ष पहले अमरनाथ मौर्य लगातार दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। पिछले दिनों समिति के एक सदस्य ने अमरनाथ के निर्वाचन को चुनौती दी थी। सदस्य ने अमरनाथ के निर्वाचन को नियम विरुद्ध बताया है। सदस्य की शिकायत पर उप निबंधक हरिंद्र सिंह ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट में भी अमरनाथ के निर्वाचन को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं।
प्रमुख आपत्ति लगातार 10 वर्ष तक इस पद पर बने रहने को लेकर है। इस बाबत उप निबंधक ने समिति के पदेन सचिव बैंक के महाप्रबंधक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील चंद्र श्रीवास्तव को पत्र लिखकर बैठक बुलाने के लिए कहा। बैठक में अमरनाथ के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा। यदि अमरनाथ को पद से हटाया जाता है तो कार्यवाहक अध्यक्ष के नाम पर भी बैठक में फैसला लिया जाएगा।
महाप्रबंधक का कहना है कि उप निबंधक के पत्र के परिपेक्ष्य में आठ अप्रैल को बैठक बुलाई गई है। आमतौर पर, अध्यक्ष ही बैठक की अगुवाई करते हैं लेकिन अमरनाथ के खिलाफ ही प्रस्ताव रखा जाएगा। इसलिए वह बैठक की अध्यक्षता नहीं करेंगे। हालांकि, अपना पक्ष रखने के लिए वह बैठक में मौजूद रहेंगे।
अमरनाथ का शेष है एक वर्ष का कार्यकाल
अमरनाथ मई 2018 में अध्यक्ष चुने गए थे। वह इस पद के लिए लगातार दूसरी बार निर्वाचित हुए थे। इस तरह से दूसरे टर्म का कार्यकाल मई 2023 में खत्म हो रहा है लेकिन अब उनके निर्वाचन पर आपत्ति उठाई गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा में हुए शामिल
दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित अमरनाथ मौर्य उस समय भाजपा में थे लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद के साथ अमरनाथ भी पाला बदलकर सपा में चले गए। विधानसभा चुनाव में सपा ने अमरनाथ को शहर पश्चिमी से उम्मीदवार भी बनाया था लेकिन अंतिम समय में टिकट ऋचा सिंह को दे दिया गया।
कार्यवाहक अध्यक्ष की होगी नियुक्ति
सहकारी समितियों के बोर्ड गठन के लिए बैंक का अलग चुनाव आयोग है। बोर्ड की बैठक में हुए निर्णय की रिपोर्ट आयोग को भी भेजी जाएगी। अमरनाथ के निर्वाचन को निरस्त किया जाता है तो नए सिरे से चुनाव का निर्णय आयोग लेगा। तब तक के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।
आमतौर पर उपाध्यक्ष को ही कार्यभार दिया जाता रहा है। ऐसे में उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को चार्ज मिल सकता है। इनके अलावा बोर्ड के किसी सदस्य को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इतना ही नहीं बोर्ड की हर बैठक की अलग-अलग सदस्य भी अध्यक्षता कर सकते हैं।
‘निर्वाचन पर आपत्ति गलत है। नियमानुसार निर्वाचन के 45 दिन के भीतर इस पर आपत्ति जताई जा सकती है। अब चार वर्ष बाद इस तरह से आपत्ति उठाना और बैठक बुलाना समझ से परे हैं। बोर्ड की बैठक में निर्णय के आधार पर ही आगे कदम उठाए जाएंगे। बोर्ड निर्वाचन निरस्त करता है तो कोर्ट जाएंगे।’ -अमरनाथ मौर्य - अध्यक्ष