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Amar Ujala Impact : एक्सपायरी नमकीन की बिक्री मामले पर अब 20 मार्च को सुनवाई
Fri, 28 Feb 2020 03:02 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 28 Feb 2020 03:02 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
बाजार में नामी कंपनियों की एक्सपायरी नमकीन बेचे जाने के मामले में हाईकोर्ट अब 20 मार्च को सुनवाई करेगा। इस मामले में शुक्रवार को सरकारी वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी मांगी है जिसे एकत्र करने लिए उन्हें थोड़ा और समय लगेगा। इस अनुरोध को मंजूर करते हुए मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 20 मार्च को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अमर उजाला में प्रकाशित एक्सपायरी नमकीन को रीसायकल कर बाजार में बेचे जाने संबंधी रपट पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर के जनहित याचिका कायम की थी।
‘अमर उजाला नेटवर्क’ पर 21 फरवरी को प्रकाशित इस रिपोर्ट पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को स्वत: योजित जनहित कायम करने का निर्देश दिया थ्ाा। ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि नामी गिरामी कंपनियों के एक्सपायरी नमकीन पैकेट, पशुओं को खिलाने के नाम पर नीलामी में सस्ते दाम पर खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद कालाबाजारी करने वाले इस नमकीन को नए रैपर में पैक कर दुकानों पर सप्लाई कर देते हैं, जो आम लोगों के घरों तक पहुंचता है। यह रिजेक्टेड नमकीन स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है।
हल्दीराम, बीकाजी, बीकानेरी, पारले, बालाजी और क्रक्स जैसी कंपनियों की एक्सपायरी नमकीन पशुओं के चारे के लिए नीलाम की जाती हैं। इसे खरीदने के बाद नई चमकदार पैकिंग में पैक किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना तकरीबन सौ टन एक्सपायरी नमकीन की खपत होती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कंपनियां एक्सपायरी नमकीन 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचती थीं। मगर बीते दो तीन वर्षों में कालाबाजारी करने वालों में प्रतिस्पर्धा और होली के त्योहार के मद्देनजर मौजूदा समय में इसकी कीमत 35 से 37 रुपये प्रति किलो है। इसमें पांच रुपये प्रतिकिलो का स्पेशल नमक और रिजेक्टेड मिर्च भी खुले बाजार से खरीदकर मिलाई जाती है।
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‘अमर उजाला नेटवर्क’ पर 21 फरवरी को प्रकाशित इस रिपोर्ट पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को स्वत: योजित जनहित कायम करने का निर्देश दिया थ्ाा। ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि नामी गिरामी कंपनियों के एक्सपायरी नमकीन पैकेट, पशुओं को खिलाने के नाम पर नीलामी में सस्ते दाम पर खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद कालाबाजारी करने वाले इस नमकीन को नए रैपर में पैक कर दुकानों पर सप्लाई कर देते हैं, जो आम लोगों के घरों तक पहुंचता है। यह रिजेक्टेड नमकीन स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है।
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हल्दीराम, बीकाजी, बीकानेरी, पारले, बालाजी और क्रक्स जैसी कंपनियों की एक्सपायरी नमकीन पशुओं के चारे के लिए नीलाम की जाती हैं। इसे खरीदने के बाद नई चमकदार पैकिंग में पैक किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना तकरीबन सौ टन एक्सपायरी नमकीन की खपत होती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कंपनियां एक्सपायरी नमकीन 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचती थीं। मगर बीते दो तीन वर्षों में कालाबाजारी करने वालों में प्रतिस्पर्धा और होली के त्योहार के मद्देनजर मौजूदा समय में इसकी कीमत 35 से 37 रुपये प्रति किलो है। इसमें पांच रुपये प्रतिकिलो का स्पेशल नमक और रिजेक्टेड मिर्च भी खुले बाजार से खरीदकर मिलाई जाती है।