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हमें हमारे घर के चरागों से ही आग लगी
Fri, 19 Apr 2019 12:03 AM IST
विनोद सिंह
News Desk, Amarujala, Prayagraj
News Desk, Amarujala, Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 19 Apr 2019 12:03 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
हमें हमारे घर के चरागों से ही आग लगी है। जो सभागार तमाम बौद्धिक चिंतन एवं विधिक सामाजिक गतिविधियां का केंद्र था, उसे जलाने के पीछे नकारात्मक मानसिकता का हाथ था। यह बात इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने विधि विभाग सभागार के पुनर्निर्माण के उद्घाटन पर कही।
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वर्ष 2017 में हॉस्टल वॉश आउट के विरोध में सभागार में आग लगा दी गई थी। पूरा सभागार राख में तब्दील हो गया था। कुलपति ने कहा कि मैं राख से भी निर्माण का हौसला रखता हूं। इस सभागार को जिन लोगों ने जलाया था, वे बाहरर से नहीं आए थे बल्कि यही के चंद उपद्रवी थे। विधि संकाय के डीन प्रो. आरके चौबे ने कहा कि सभागार में केवल मेज और कुर्सी नहीं, बल्कि हमारे हौसले एवं अरमानों को भी जलाने का प्रयास किया गया था। विश्वविद्यालय के कुलपति ने इसके पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया। पिछले छह माह से निर्माण कार्य चल रहा था। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्लेष गौतम एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चित्तरंजन कुमार ने किया। इस मौके पर रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला, एफओ डॉ. सुनील कांत मिश्र, अभियंता नवीन सिंह, प्रो. अनुपम दीक्षित, प्रो. अनुपम पांडेय, प्रो. राधेश्याम सिंह आदि मौजूद रहे।
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