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890 हेड कांस्टेबलों को पीएसी में भेजने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Fri, 02 Oct 2020 07:18 PM IST
Prayagraj Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Fri, 02 Oct 2020 07:18 PM IST
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Allahabad High court stays the order to send 890 head constables to PAC
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हेड कांस्टेबल से कांस्टेबल के पद पर रिवर्ट ( पदावनत) कर पी ए सी में भेजने के 9 व 10 सितंबर 2020 के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश से पदावनत किए गए करीब 900 कांस्टेबलों को बड़ी राहत मिली है। शासन की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल तथा हेड कांस्टेबलों की ओर से सीनियर एडवोकेट विजय गौतम ने बहस की। इससे पूर्व अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कांस्टेबलों को पी ए सी में भेजने का आदेश संसोधित कर दिया गया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने हेड कांस्टेबल पारस नाथ पाण्डेय समेत सैकडों अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में 9 सितम्बर 2020 व 10 सितम्बर 2020 को पारित डीआईजी स्थापना, पुलिस  मुख्यालय, उप्र व अपर पुलिस महानिदेशक,  पुलिस मुख्यालय उप्र के आदेशों को चुनौती दी गई है । इन आदेशों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 890 हेड कांस्टेबलों को पदावनत कर  आरक्षी बना दिया गया है।
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यह मामला सामने आने के बाद कांस्टेबलों ने हाइकोर्ट की शरण ली। उधर मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेते हुए डी जी पी को निर्देश दिया था कि कांस्टेबलों को नियमानुसार प्रोन्नति दी जाए। इसके बाद एडीजीपी ने आदेश में संसोशन कर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने बताया कि संसोशित आदेश में कांस्टेबलों को पीएसी में भेजने के बाद वहीँ पर प्रोन्नति पर विचार करने के निर्देह दिए गए थे।
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इससे कांस्टेबल संतुष्ट नहीं है। अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि इतने वृहद स्तर पर हेड कांस्टेबलों को बगैर उन्हें सुनवाई का अवसर दिए पदावनत करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त के विपरीत है । कहा यह भी गया है कि याचियो को 20 वर्ष के बाद सिविल पुलिस से पीएसी में वापस  भेजना शासनादेशो के विरूद्ध है । कोर्ट ने अब इन याचिकाओं पर एक माह बाद सुनवाई करेगी।
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