allahabad University : पश्चिम बंगाल के नंबर से बनाया था इविवि वीसी के नाम का व्हाट्सएप ग्रुप
मामला तीन जनवरी को सामने आया था, जिसमें कुलानुशासक की ओर से कर्नलगंज थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता श्रीवास्तव की फोटो और नाम का प्रयोग करते हुए किसी ने तीन जनवरी को एक नए नंबर से व्हाट्सएप बिजनेस एकाउंट बनाया।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप पश्चिम बंगाल के नंबर से बनाया गया था। पुलिस की जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है। अब पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में बंगाल जाएगी, जिसके पते पर सिम लिया गया। पुलिस का कहना है कि उसके पकड़े जाने के बाद ही मामले का खुलासा हो सकेगा।
मामला तीन जनवरी को सामने आया था, जिसमें कुलानुशासक की ओर से कर्नलगंज थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता श्रीवास्तव की फोटो और नाम का प्रयोग करते हुए किसी ने तीन जनवरी को एक नए नंबर से व्हाट्सएप बिजनेस एकाउंट बनाया। इसके बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों का एक ग्रुप बनाकर एक के बाद एक कई मैसेज किए। ग्रुप में आपत्तिजनक और अनावश्यक मैसेज देखकर शिक्षकों ने कुलपति को इसकी जानकारी दी।
उन्होंने इस ग्रुप और नंबर के बारे में अनभिज्ञता जताई। किसी ने षड्यंत्र के तहत उनकी फोटो और नाम का प्रयोग करते हुए ग्रुप बनाया था। जांच में जुटी पुलिस ने उक्त नंबर की डिटेल खंगाली तो पता चला कि यह पश्चिम बंगाल का है। कर्नलगंज पुलिस का कहना है कि एक टीम बंगाल भेजकर पता लगाया जाएगा कि उक्त नंबर से संबंधित सिम किसके नाम पर लिया गया। यह भी आशंका है कि साइबर अपराधी ने फर्जी आईडी पर सिम लिया हो।
हाईकोर्ट बार के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदिग्ध हाल में लापता
हाईकोर्ट बार के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद तिवारी (60) संदिग्ध हाल में लापता हो गए हैं। परिजनों ने कर्नलगंज थाने में उनक ी गुमशुदगी दर्ज कराई है। मूल रूप से जौनपुर के बक्शा थाना क्षेत्र स्थित अगरौरा के रहने वाले मंगला प्रसाद कर्नलगंज के छोटा बघाड़ा में किराये के मकान में रहते थे। पुलिस के मुताबिक, उनके बटे मनोज ने बताया कि वह शहर में रहते थे, जबकि उनका परिवार गांव स्थित पैतृक मकान में रहता है।
तीन जनवरी को वह मिलने गए तो पिता के कमरे में बाहर से ताला बंद मिला। फोन भी बंद था। ताला तोड़कर वह कमरे में गया तो मोबाइल बिस्तर पर बंद पड़ा था। बहुत खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद उसने थाने में सूचना दी। एक दिन पहले परिजनों ने बातचीत में बताया है कि उनके गोरखपुर में होने की बात पता चली है। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनकी खोजबीन की जा रही है।