इलाहाबाद विश्वविद्यालय : फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों ने खोला मोर्चा, दी आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बैठक में छात्रों ने कहा कि फीस वृद्धि छात्रों पर जबरन थोपना उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। एबीवीपी की ओर से इसके विरोध में सभी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा और अगर जल्द ही फीस वृद्धि को वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में सत्र 2022-23 से नव प्रवेशी विद्यार्थियों की फीस में तीन से चार गुना तक वृद्धि किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। सभी छात्र संगठनों ने विरोध में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को छात्र संगठनों की अलग-अलग हुई बैठकों में तय किया गया कि फीस बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो इसका व्यापक विरोध होगा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बैठक में छात्रों ने कहा कि फीस वृद्धि छात्रों पर जबरन थोपना उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। एबीवीपी की ओर से इसके विरोध में सभी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा और अगर जल्द ही फीस वृद्धि को वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। एबीवीपी के इकाई अध्यक्ष शिवम सिंह ने कहा कि सरकार ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों का बजट बढ़ाया है। अगर इविवि इसमें पीछे है तो इसमें छात्रों का क्या दोष। छात्रों पर निर्भर होने के जाय विश्वविद्यालय को अपने संसाधन बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।
इस मसले पर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया की इलाहाबाद जिला कमेटी ने भी पाठ्यक्रमों और छात्रावासों की फीस बढ़ाए जाने का विरोध किया है। कमेटी के सदस्यों ने तीन से चार गुना फीस वृद्धि को असंवेदनशील और छात्र विरोधी बताया है। विश्वविद्यालय में ज्यादातर छात्र-छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आते हैं और किसानों के बच्चे हैं। कुछ बड़ा करने का सपना लेकर यहां आने वाले विद्यार्थी तीन से चार गुना फीस कैसे देंगे। ऐसे में कई विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ जाएगा। सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस वृद्धि का निर्णय शीघ्र वापस नहीं लेता है तो इसके खिलाफ प्रदर्शन होगा।
अफसरों ने जुटाए सुविधा के सामान, छात्रों पर लादा बोझ
इविवि में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर छात्र नेता अजय यादव सम्राट के नेतृत्व में 706 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने भी छात्रसंघ भवन के सामने बैठक कर फीस वृद्धि पर विरोध दर्ज कराया। साथ ही चार गुना तक फीस वृद्धि के विरोध में व्यापक आंदोलन के लिए रणनीति बनाई गई। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसर अपनी सुख-सुविधाओं के लिए सरकारी धन से लग्जरी वाहन खरीद रहे हैं और दूसरी ओर संसाधनों की कमी बताकर छात्रों पर फीस वृद्धि का बोझ लाद रहे हैं।
सोशल मीडिया पर चलाया जाएगा अभियान
आइसा के बैठक में भी फीस वृद्धि का विरोध किया गया। विवेक, विकास, मनीष, सोनू ने कहा कि विश्वविद्यालय की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में निर्णय लिया जाता है कि सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के खिलाफ बोलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय के पीछे यही वजह है कि छात्र या शिक्षक फीस वृद्धि के मामले में विश्वविद्यालय के खिलाफ खुलकर न बोल सकें, लेकिन छात्र पीछे नहीं हटेंगे। सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन को फीस वृद्धि का निर्णय वापस लेना होगा।