इलाहाबाद विवि : शहरियों को फिर समय बताएगी सीनेट हॉल की घड़ी, जीर्णोद्धार के लिए मिला अनुदान
इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि हीफा से मिली ग्रांट से सीनेट हॉल के टॉवर और उस पर लगी घड़ी की मरम्मत कराई जाएगी। सीनेट हॉल की छत लगे विशेष डिजाइन वाले खपरैल और लकड़ी भी खराब हो गई है, जिन्हें बदला जाएगा। खिड़कियों के टूटे कांच और स्टेज के टूटे टाइल्स भी बदले जाएंगे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कला संकाय में सीनेट हॉल की घड़ी शहरियों को फिर से समय बताएगी। सीनेट हॉल और उसके टॉवर पर लगी घड़ी के जीर्णोद्धार के लिए इविवि को उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (हीफा) से 15 करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हुई है। 26 जनवरी को कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव इसकी घोषणा की।
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) ने एक सर्वेक्षण के तहत इविवि की चार ऐतिहासिक इमारतों विजयनगरम हॉल, सीनेट हॉल, दरभंगा हॉल और अंग्रेजी विभाग के जीर्णोद्धार के लिए फरवरी 2008 में अपनी रिपोर्ट इविवि प्रशासन को सौंपी थी। 2019 में तत्कालीन कुलपति प्रो. हांगलू ने सीनेट हाल के अंदर रंग रोगन का कार्य कराया था लेकिन सीनेट हॉल के टावर पर लगी घड़ी नहीं चलाई जा सकी।
इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि हीफा से मिली ग्रांट से सीनेट हॉल के टॉवर और उस पर लगी घड़ी की मरम्मत कराई जाएगी। सीनेट हॉल की छत लगे विशेष डिजाइन वाले खपरैल और लकड़ी भी खराब हो गई है, जिन्हें बदला जाएगा। खिड़कियों के टूटे कांच और स्टेज के टूटे टाइल्स भी बदले जाएंगे। इमारत के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसको मजबूत किया जाएगा।
इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि यह घड़ी किसी जमाने में शहरियाें को वक्त बताया करती थी। जो समय होता था, उतनी बार इस घड़ी का घंटा बजा करता था और इसकी आवाज दूर तक जाती थी। घंटे की आवाज सुनकर लोग समय का पता लगा लिया करते थे और यह घड़ी शहर के लोगों की दिनचर्या तय किया करती थी।
सर स्विंटन जैकब ने तैयार की थी इमारत की रूपरेखा
सन 1858 में अंग्रेजी सेना की बॉम्बे आर्टिलरी में सर्वेयर और इंजीनियर के पद पर नियुक्त सर स्विंटन जैकब ने 1908 से 1912 के बीच इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा अधिग्रहीत भूमि (कला संकाय) में विश्वविद्यालय की मुख्य इमारत सीनेट हॉल की रूपरेखा राजपूत और मुगल शैली में तैयार की थी। इस इमारत के टॉवर पर एक भव्य घड़ी भी स्थापित की गई थी, जिसकी प्रेरणा सर जैकब ने लंदन की बिग-बैन घड़ी कंपनी से ली थी। 1912 में सीनेट हॉल का घंटाघर तैयार हो गया था।