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इलाहाबाद विवि, कालेजों में कम हो गईं एलएलबी की 579 सीटें

Sun, 24 Jul 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 24 Jul 2016 02:23 AM IST
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Allahabad University , LLB 579 seats were at colleges
काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में एलएलबी ऑनर्स में दाखिला के इच्छुक छात्र-छात्राओं की उम्मीदों को झटका लगा है। विश्वविद्यालय और सीएमपी तथा इलाहाबाद डिग्री कालेज में शिक्षकों और संसाधनों की कमी की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इसकी वजह से बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने तीनों संस्थानों की एलएलबी तीन वर्षीय की 579 सीटें कम कर दी हैं। इतना ही नहीं काउंसिल ने बीएएलएलबी पांच वर्षीय पाठ्यक्रम की भी तीन सीट घटाकर 123 से 120 कर दी है। प्रवेश कोर कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में विभागाध्यक्ष ने यह जानकारी दी। कमेटी ने काउंसिल से स्वीकृत सीटों के लिए दाखिले की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
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विश्वविद्यालय के एलएलबी तीन और बीएलएलबी पांच वर्षीय पाठ्यक्रमों के लिए कई वर्षों से बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुमति नहीं ली गई थी। इससे इन कोर्सेज की मान्यता पर ही सवाल खड़ा हो गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रवेश प्रक्रिया भी बीच में रोकनी पड़ी थी। हालांकि, काउंसिल से सत्र 2016-17 के लिए अनुमति मिलने के बाद इन पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर गतिरोध तो दूर हो गया है, लेकिन सीटें कम हो गई हैं। विश्वविद्यालय और दोनों संघटक कालेजों में एलएलबी की 493-493 यानी, कुल 1479 सीट थी, लेकिन काउंसिल ने इस बार सिर्फ 900 सीट पर प्रवेश की अनुमति दी है।
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शिक्षकों की संख्या और संसाधन के आधार पर काउंसिल ने तीनों संस्थानों में 60-60 विद्यार्थियों के सिर्फ पांच-पांच सेक्शन बनाने की अनुमति दी है। इस तरह से तीनों संस्थान में इस बार सिर्फ 300-300 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। काउंसिल ने विश्वविद्यालय में संचालित होने वाले बीएएलएलबी कोर्स में भी तीन सीट कम कर दी है। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक  प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि एडमिशन कोर कमेटी की बैठक में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरके चौबे ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों पाठ्यक्रमों के लिए जल्द से जल्द से प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए कमेटी की बैठक के तत्काल बाद संबंधित एजेंसी को पत्र लिख दिया गया। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र के चयन की जिम्मेदारी टीसीएस से ले ली गई है। प्रवेश प्रकोष्ठ ही केंद्र का निर्धारण करेगा। ऐसा पूर्व में हुई गड़बड़ी को देखते हुए किया गया है।
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