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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कर्मचारी के परिवार ने मांगी इच्छा मृत्यु

Tue, 02 Apr 2019 01:40 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 02 Apr 2019 01:40 AM IST
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Allahabad University employee's family sought death wish
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कर्मचारी नेता संतोष सहाय को आठ वर्षों से वेतन नहीं मिला है। इविवि प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था और पूरा वेतन भी रोक लिया। परिवार अब भुखमरी की कगार पर है। संतोष की पत्नी उपमा सहाय ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर परिवार के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की है। 
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उन्होंने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि पति को वेतन न मिलने के कारण घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। कर्ज लेकर गुजर-बसर करनी पड़ रही है। आए दिन लोग ब्याज और रुपयों के लिए घर आकर दबाव बनाते हैं और अपशब्द कहते हैं। वह और उनके पति कुपोषण का शिकार हो गए हैं। इलाज कराने के लिए भी पैसा नहीं है। चार बच्चे हैं, जिन्हें आगे पढ़ा पाना मुश्किल हो रहा है और इन सबके लिए इविवि के अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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ऐसी परिस्थितियों में जीना मुश्किल हो गया है, सो इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। कर्मचारी नेता संतोष सहाय का कहना है कि वेतन तो दूर, इविवि प्रशासन ने गुजारा भत्ता तक नहीं दिया। एक दिन इविवि के वित्त अधिकारी का अचानक पत्र मिला कि वेतन का 15 लाख 80 हजार 512 रुपये का चेक रजिस्टर्ड डाक से घर भेज दिया गया है लेकिन, चेक घर नहीं पहुंचा। इविवि प्रशासन पैन कार्ड मांग रहा है, जो उनके पास नहीं है। वैसे भी वह आयकर कटौती की सीमा में नहीं आते हैं। केवल इस आधार पर आठ साल तक वेतन रोककर रखना अन्याय और नियम विरुद्ध है। 
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वहीं, वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र का कहना है कि चेक रजिस्टर्ड डाक से संतोष सहाय के आवासीय पते पर भेजा गया था। वहां किसी ने इसे स्वीकार नहीं किया और चेक वापस आ गया। उन्होंने संतोष को 29 मार्च को फोन कर कहा कि विश्वविद्यालय आकर चेक ले जाएं लेकिन, वह नहीं आए। उन्होंने बहुत पुराना एकाउंट नंबर दे रखा है, जो कोर बैंकिंग में नहीं है। उनसे एकाउंट नंबर भी मांगा गया था लेकिन, उन्होंने नहीं दिया, जबकि वेतन अब ऑनलाइन कर्मचारी के खाते में भेजा जाता है। वेतन का भुगतान होने के बावजूद संतोष वेतन लेने से पीछे क्यों हट रहे हैं, यह समझ से परे है।
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