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Allahabad University : कनिष्क के पितामह और स्कंदगुप्त काल के हैं तिजोरी में मिले सिक्के, स्वर्णाक्षर भी मिले

Sat, 19 Oct 2024 11:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Oct 2024 11:14 AM IST
सार

तिजोरी में 500 ऐतिहासिक महत्व के सिक्के मिले थे। पुस्तक के अनुसार इनमें 2000 वर्ष पुराने कनिष्क के पितामह के काल और 1000 वर्ष पुराने स्कंदगुप्त काल के सोने के अनेकों सिक्के मिले थे। प्रो.दास को पाली में सोने के अक्षरों से लिखीं 16 दुर्लभ पांडुलिपियां भी मिलीं, जो बौद्ध काल की विनाई पिठाका का हिस्सा थीं।

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Allahabad University: Coins found in the vault belong to Kanishka grandfather and Skandagupta period
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मिलने प्राचीन कालीन सिक्के। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय की तिजोरी में मिले सोने के कई सिक्के 2000 साल पुराने कनिष्क के पितामह के काल के हैं। वहीं, कुछ सिक्के एक हजार वर्ष पुराने स्कंदगुप्त के काल के हैं। तिजोरी में मिलीं बौद्धकाल की पांडुलिपियां भी सोने के अक्षरों से लिखीं गई हैं।

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वर्षों से बंद तिजोरी को 25 साल पहले अंग्रेजी के प्रो.मानस मुकुल दास ने भी खुलवाया था। उसमें मिले दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखवाने के साथ सूचीबद्ध भी किया था। पूर्व डीन साइंस प्रो.अरुण कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी व सीएमपी डिग्री कॉलेज की अध्यापक रहीं डॉ.हेमलता श्रीवास्तव की पुस्तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कीर्तिस्तंभ नामक पुस्तक में इसका पूरा वर्णन है।
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पुस्तक के अनुसार प्रो.मानस मुकुल दास कुछ समय के लिए पुस्तकालय अध्यक्ष भी रहे। उसी दौरान उन्होंने पुस्तकालय में वर्षों से बंद तिजोरी खुलवाई थी। तिजोरी में 500 ऐतिहासिक महत्व के सिक्के मिले थे। पुस्तक के अनुसार इनमें 2000 वर्ष पुराने कनिष्क के पितामह के काल और 1000 वर्ष पुराने स्कंदगुप्त काल के सोने के अनेकों सिक्के मिले थे। प्रो.दास को पाली में सोने के अक्षरों से लिखीं 16 दुर्लभ पांडुलिपियां भी मिलीं, जो बौद्ध काल की विनाई पिठाका का हिस्सा थीं। पुस्तक के अनुसार तिजोरी में मुगलकाल के कई फरमान भी मिले। साथ ही में कई हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियां भी प्राप्त हुईं थीं।

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Allahabad University: Coins found in the vault belong to Kanishka grandfather and Skandagupta period
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लॉकर से निकले पांच सौ साल पुराने ताम्रपत्र और अभिलेख। - फोटो : अमर उजाला।

अमूल्य धरोहरों की बनाई जा रही है सूची
 

इन सभी अमूल्य धरोहरों की सूची बनाकर प्रो.मानस मुकुल दास ने इनको गोदरेज की एक सेफ में सुरक्षित रखवा दिया। इसकी तीन चाभियां कुलपति, डीन कला संकाय व लाइब्रेरियन को इस आशय से सौंप दी। ताकि, इविवि की इन अमूल्य धरोहरों को भविष्य में सहेज कर सुरक्षित रखा जा सके।

कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव की ओर से गठित विशेषज्ञों की टीम की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को फिर तिजोरी खोली गई, जिसमें ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दस्तावेज मिले। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन दस्तावेजों को फिर से तिजोरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय में रखा जाएगा। ताकि, विवि के विद्यार्थी इन पर अध्ययन कर सकें।

प्रो.अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि तिजोरी के दोबारा खोलने के बाद मिलीं अमूल्य धरोहरों की प्रो.दास के समय तैयार की गई सूची से भी मिलान करा लेना चाहिए। ताकि, इसे सुनिश्चित किया जा सके कि बीच में तिजोरी को खोलकर इन धरोहरों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है।

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