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बोनस भुगतान के खिलाफ कोर्ट पहुंचे नियोजक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:27 PM IST
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केंद्र सरकार द्वारा लागू बोनस भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2015 की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में भारत के आटर्नी जनरल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
बेनारा उद्योग लिमिटेड ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। मांग की है कि संशोधन एक्ट 31 मार्च 2015 से पूर्व के वित्तिय वर्ष में लागू करने के लिए कंपनी को बाध्य न किया जाए। सरकार ने बोनस संशोधन एक्ट को एक जनवरी 2016 को मंजूरी देते हुए गजट में प्रकाशित किया है। इसकी धारा 1(2) में प्रावधान है कि संशोधन एक अप्रैल 2014 से लागू होगा। इस दौरान कर्मचारियों केवेतन में वृद्धि की गई है।
बोनस देने की सीमा इस वित्तीय वर्ष से आठ माह पूर्व से लागू करने का आदेश दिया गया है इसका अर्थ है कि संशोधन अधिनियम का भूतलक्षी प्रभाव होगा। इससे नियोजकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा। संशोधन समता के अधिकार के विरुद्ध है। कनार्टक हाईकोर्ट ने इसे वित्तिय वर्ष 2015-16 से ही लागू करने का निर्देश दिया है।
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बेनारा उद्योग लिमिटेड ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। मांग की है कि संशोधन एक्ट 31 मार्च 2015 से पूर्व के वित्तिय वर्ष में लागू करने के लिए कंपनी को बाध्य न किया जाए। सरकार ने बोनस संशोधन एक्ट को एक जनवरी 2016 को मंजूरी देते हुए गजट में प्रकाशित किया है। इसकी धारा 1(2) में प्रावधान है कि संशोधन एक अप्रैल 2014 से लागू होगा। इस दौरान कर्मचारियों केवेतन में वृद्धि की गई है।
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बोनस देने की सीमा इस वित्तीय वर्ष से आठ माह पूर्व से लागू करने का आदेश दिया गया है इसका अर्थ है कि संशोधन अधिनियम का भूतलक्षी प्रभाव होगा। इससे नियोजकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा। संशोधन समता के अधिकार के विरुद्ध है। कनार्टक हाईकोर्ट ने इसे वित्तिय वर्ष 2015-16 से ही लागू करने का निर्देश दिया है।
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